अखिलेश-राहुल के रोड शो ने रचा इतिहास, उमड़ा जनसैलाब
अखिलेश-राहुल के रोड शो ने रचा इतिहास, उमड़ा जनसैलाब


लखनऊ: लखनऊ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एवं कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के रोड.शो ने जन सैलाब का कीर्तिमान रच दिया। जीपीओ स्थित गांधी प्रतिमा से पुराने लखनऊ चैक तक कार्यकर्ताओं की भारी हुजूम ने देश के दो ताकतवर नेताओं के साथ एक नये भारत के निर्माण की दस्तक दी है। जन समर्थन का यह उत्साह जीत का संदेश दे रहा था।
 यह न केवल उत्तर प्रदेश की जनता के लिए बल्कि भारत के लिए भी संदेश है। यही भारत की दिशा भी है। लखनऊ के चैक में तो पूरा पुराना लखनऊ ही दोनों नेताओं के स्वागत में उमड़ पड़ा था।विजय रथ के साथ पूरे रास्ते जन समुद्र था। इतिहास की यह नई करवट लखनऊ के हृदय स्थल हजरतगंज से शुरू हुयी। 
नौजवानों को यह भरोसा जगा कि उनका भविष्य दोनों नेताओं के हाथों में सुरक्षित है। उत्तर प्रदेश की राजधानी में आम जनता के उत्साह  का ऐसा दृश्य पहली बार देखा गया। कई जगह पांचवी मंजिल से महिलायें फूल वर्षा कर रही थी। श्रमिकों, महिलाओं, कर्मचारियों ने अपना काम बंद कर दोनों नेताओं का भरपूर अभिवादन किया। पुराने लखनऊ में तो लोग अपने परंपरागत वाद्य यंत्रो से स्वागत कर रहे थे। छतों से ही बच्चे, लड़कियां और महिलाएं अपने मोबाइल से फोटो खींच रही थी। पुराने लखनऊ में चिकनकारी के कारीगर, महिलाएं अखिलेश यादव और राहुल गांधी के समर्थन में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही थी। 
नजीराबाद, अमीनाबाद में हिन्दू और मुस्लिम दोनों में गजब का उत्साह था। अमीनाबाद बाजार में छोटे.छोटे बच्चो को उनके माता पिता कंधों पर उठाकर दोनों नेताओं को दिखाने में लगे थें कैसरबाग चैराहे पर भी जनता उत्साह जनक नारों से कार्यकर्ताओं के आत्मविश्वास को बढ़़ा रही थी।

 अमीनाबाद में झण्डेवाला पार्क के चारों तरफ सडक़ों पर हजारों की तादात में लोग इकट्टा थे। सच तो यह है कि जो तमाम लोग साथ चल रहे थे उनमें भाजपा की विभेदकारी नीतियों के खिलाफ काफी गुस्सा था जिसका वे इज़हार भी कर रहे थे। समाजवादी और कांग्रेस के परस्पर निकट आने को वे शुभ संयोग मान रहे थे। एक बुजुर्ग ने तो कहा अब तो फतेह जरूर होगी। 
12 किलोमीटर के रास्ते पर कई टन फूलों की वर्षा हुयी। विजय रथ में अहमद हसनए राजबब्बरए राजेन्द्र चैधरी मौजूद थे। विजय रथ यात्रा में लगभग 1 लाख स्त्री.पुरूषों और नौजवानों की भागीदारी का संदेश स्पष्ट था कि उनका समर्थन सांप्रदायिकता के विरूद्ध धर्मनिरपेक्षता के लिए है। भाजपा नेताओं की बदज़ुबानी और आतंकी भाषा का जवाब भी जनता की भारी उमड़ी भीड़ ने दिया है। यही लोकतंत्र में अंहकार का सटीक उत्तर है। लखनऊ में विजय रथ के सफल रोड.शो से विपक्षी दल सकते में आ गये। भाजपा और बसपा ने बौखलाहट में अनर्गल प्रलाप करना शुरू कर दिया है।
 पिछली सरकार में भय और भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबकर सत्ता से हटने के बाद बसपा सुप्रीमों मायावती ने पांच साल जनता से दूरी बनाये रखी। अब चुनाव की घोषणा होने के बाद जनता का पूरा भरोसा अखिलेश यादव में दिख रहा है और कांग्रेस से गठबंधन के बाद भारी बहुमत की सरकार का आना तय दिख रहा हैए ऐसे में बसपा हतोत्साहित होकर फिजूल बयान दे रही है।  अपने चाल.चरित्र से भटक चुकी भाजपा एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति को साम्प्रदायिकता के रंग में रंगना चाहती है। सपा.कांगेस गठबंधन से भाजपा को अपनी बुरी गति तय दिख रही है। उत्तर प्रदेश का यह चुनाव देश का चुनाव है। यह परिणाम राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करेगा। अखिलेश यादव के पांच वर्षों के शासन काल ने जिस तेजी से प्रदेश की सूरत बदली है, वह पिछले साठ वर्षों से किसी मुख्यमंत्री के कार्यकाल पर भारी है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा.कांगेस गठबंधन एक इतिहास रचने जा रही हैं। राजधानी से मिले अपार जन समर्थन के बाद यह हवा पूरे प्रदेश में फैल रही है, जो अखिलेश यादव को दुबारा मुख्यमंत्री बनाने में निर्णायक साबित होगी। 


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