मौर्य का आरोप, गायत्री को मुख्यमंत्री आवास में छिपाया गया
सत्ता के प्रभाव से मामले में पुलिसिया कार्रवाई कछुए की चाल की तरह चल रही है।


लखनऊ : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने आरोप लगाते हुए कहा कि महिला से सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी सपा सरकार के कैबिनेट गायत्री प्रसाद प्रजापति को मुख्यमंत्री आवास पर छिपा कर रखा गया है। पुलिस उनकी गिरफ्तारी का नाटक कर रही है। सीएम अखिलेश गंगा की कसम खाकर कहें कि उन्होंने अपने कैबिनेट मंत्री को अपने आवास में नहीं छिपाया है? केशव का आरोप है कि अपराधियों को संरक्षण देने में अखिलेश यादव को उपाधि मिलनी चाहिए। वह प्रदेश के बड़े अपराधियों के संरक्षक हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा गायत्री की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करती है। केशव ने कहा कि दुष्कर्म के आरोपी कैबिनेट मंत्री को मत छुपाओ। 

अखिलेश आप चाहोगे तो 10 मिनट के अंदर आरोपी मंत्री जेल में जाएगा। गौरतलब है कि आरोपी मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति, अशोक तिवारी, पिंटू सिंह, विकास वर्मा, चंन्द्र पाल, रूपेश और आशीष शुक्ला के खिलाफ के खिलाफ लखनऊ के थाना गौतमपल्ली में नाबालिग के साथ गैंगरेप का मामला दर्ज है। सत्ता के प्रभाव से मामले में पुलिसिया कार्रवाई कछुए की चाल की तरह चल रही है। हालांकि एडीजी एलओ का कहना है कि मामले में पीड़ितों के बयान और सभी जरुरी साक्ष्य जुटाने पर ही अंतिम कार्रवाई की जाएगी। 

एडीजी ने यह बातें मंत्री गायत्री की गिरफ्तारी की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कहीं। उन्होंने बताया कि मामले की विवेचक सीओ आलमबाग अमिता सिंह द्वारा पीड़िता का 164 सीआरपीसी के तहत न्यायालय में कलमबद्ध बयान हो चुका है। पीड़िता की बेटी के बयान के लिए विवेचक की टीम दिल्ली गई थी जहां उसका बयान दर्ज किया गया। पुलिस के मुताबिक, गायत्री और उनके साथ इस केस में आरोपी अभी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। बयान और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। 

इस मामले में चित्रकूट जिले की एक पार्षद ने मंत्री गायत्री समेत उनके गुर्गों पर सामूहिक बलात्कार के साथ ही बेटी के साथ भी यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था। पीड़िता ने जनपद स्तर से लेकर सूबे के पुलिस अधिकारियों से शिकायत की थी, लेकिन मंत्री के दबाव के चलते आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया था। हालांकि इस मामले में सीबीसीआईडी की जांच चल रही थी। लेकिन इस जांच से महिला संतुष्ठ नहीं थी। 

इसके चलते आरोपियों को सजा दिलाने के लिए पीड़िता को सुप्रीम कोर्ट की मदद लेनी पड़ी थी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाईं थी। इस मामले में पीड़िता की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया था। इस आदेश का पालन करने के लिए पुलिस अधिकारियों ने विधिक राय लेने के बाद गायत्री प्रजापति समेत 7 लोगों के खिलाफ 18 फरवरी को गौतमपल्ली थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया था। 


अधिक राज्य की खबरें