वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर के विलय का ऐलान
वोडाफोन के एग्जिक्युटिव्स ने 16 मार्च को एक मीटिंग में मर्जर संबंधी ड्यू डिलिजेंस की प्रोग्रेस की समीक्षा की थी।


नई दिल्ली : वोडाफोन पीएलसी ने आइडिया सेल्युलर के साथ विलय का ऐलान कर दिया। वोडाफोन बोर्ड ने सोमवार को विलय के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। इसके तहत वोडाफोन इंडिया और इसके पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी वोडाफोन मोबाइल सर्विसेज लिमिटेड का आदित्य बिड़ला ग्रुप के आइडिया सेल्युलर में विलय हो जाएगा। 

आइडिया और वोडाफोन की विलय प्रक्रिया अगले साल पूरी हो जाएगी। नई कंपनी में वोडाफोन की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत जबकि आइडिया की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत होगी। आगे जाकर आदित्य बिड़ला ग्रुप और वोडाफोन का हिस्सा बराबर हो जाएगा। आइडिया का वैल्युएशन 72,2000 करोड़ रुपया होगा। फाइलिंग के मुताबिक, एबी ग्रुप के पास 130 रुपये प्रति शेयर की दर से नई कंपनी के 9.5 प्रतिशत खरीदने का अधिकार होगा।

वोडाफोन और आइडिया के विलय से बनी नई कंपनी भारत की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी हो जाएगी। अभी भारती एयरटेल देश की सबसे बड़ी कंपनी है। सूत्रों के मुताबिक, वोडाफोन मर्जर के बाद बनने वाली कंपनी में सीईओ और सीएफओ दोनों पद मांग रहा है। उसे नई कंपनी का चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला को घोषित करने से कोई ऐतराज नहीं होगा।

इस कंपनी का सीईओ वोडाफोन पीएलसी के किसी ग्लोबल एग्जिक्युटिव को बनाया जा सकता है, यह जानकारी दो सूत्रों ने दे ही। एक तीसरे सूत्र ने बताया कि टॉप लेवल रिक्रूट की तलाश शुरू भी हो गई है। वोडाफोन पीएलसी और आइडिया सेल्युलर पर मालिकाना हक रखने वाले आदित्य बिड़ला ग्रुप ने इस मामले में  सवालों के जवाब नहीं दिए।

वोडाफोन के एग्जिक्युटिव्स ने 16 मार्च को एक मीटिंग में मर्जर संबंधी ड्यू डिलिजेंस की प्रोग्रेस की समीक्षा की थी। इसमें नई कंपनी के वैल्यूएशन पर भी विचार किया गया था, जिस हिसाब से दोनों पक्षों की हिस्सेदारी तय होगी। इस मीटिंग में वोडाफोन के अफ्रीका, मिडल ईस्ट और एशिया पैसिफिक सीईओ विवेक बद्रीनाथ भी शामिल हुए थे। मीटिंग में ऑपरेशनल इंटीग्रेशन, कंबाइंड इन्फ्रास्ट्रक्चर, मर्जर के बाद किन चीजों की जरूरत नहीं रह जाएगी और स्पेक्ट्रम होल्डिंग की लिमिट से जुड़ी विनायमकीय परेशानियों पर भी चर्चा हुई। ऐनालिस्टों का कहना है कि 1,00,000 साइट्स के संभावित ओवरलैप की आशंका है।

पहले एक रिपोर्ट में इकनॉमिक टाइम्स ने अनुमान लगाया था कि कंसॉलिडेशन की वजह से टेलिकॉम इंडस्ट्री में 1,00,000 रोजगार कम हो सकते हैं। ये नौकरियां कई टेलिकॉम ऑपरेटर और इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में खत्म हो सकती हैं। इस बीच, वोडाफोन ने ऐनुअल ऑफसाइट को टाल दिया है, जिसे मार्च महीने की शुरुआत में फाइन किया जाता है और यह अप्रैल के आखिर में होता है। कुछ ब्रैंड और मार्केटिंग खर्चों को भी रोक दिया गया है।

इसी साल वोडाफोन इंडिया ने सीनियर मैनेजमेंट के रिपोर्टिंग स्ट्रक्चर में बदलाव किया था। कंपनी ने चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर बालेश शर्मा को रिपोर्टिंग अथॉरिटी बनाया था। पहले कंपनी के सीनियर एग्जिक्युटिव्स वोडाफोन इंडिया के सीईओ को रिपोर्ट करते थे। अभी दोनों कंपनियों ने ऐक्टिव इन्फ्रास्ट्रक्चर को शेयर करने का फैसला किया है। इसमें वायरलेस इक्विपमेंट भी शामिल हैं। इसका मतलब यह है कि कोई मर्जर होता है तो उसमें बहुत दिक्कत नहीं होगी।

वोडाफोन और आदित्य बिड़ला ग्रुप ने जनवरी में कहा था कि वे इंडस टावर में वोडाफोन के 42% हिस्सेदारी को छोड़कर दोनों कंपनियों के सभी ऐसेट्स को मर्ज करने की संभावना पर काम कर रहे हैं। अगर मर्जर के बाद दोनों कंपनियों को बराबर के राइट्स दिए जाते हैं तो उसके लिए आइडिया के नए शेयर वोडाफोन को इशू करने होंगे, जिससे ब्रिटिश वोडाफोन पीएलसी खुद को वोडाफोन इंडिया से अलग कर लेगी।


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