क्या समाजवादी पार्टी में सबकुछ ठीक है??जानिये पूरी इनसाइड स्टोरी
समाजवादी पार्टी में छिड़ा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा


समाजवादी पार्टी में छिड़ा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा, सोमवार को दो कैबिनेट मंत्री और मंगलवार दोपहर मुख्य सचिव दीपक सिंघल के विकेट गिरने के बाद मंगलवार शाम मुलायम सिंह यादव ने डैमेज कंट्रोल के तहत अखिलेश यादव को पार्टी अध्यक्ष के पद से हटाकर शिवपाल यादव को पार्टी की कमान सौंप दी। पिता के इस अप्रत्याशित कदम के बाद अखिलेश और उग्र हो गए और उन्होंने चाचा शिवपाल के सभी महत्वपूर्ण विभाग छीन लिए। 

इसके बाद शुरू हुआ अटकलों और सोशल मीडिया पर खबरों की बाढ़ का दौर। कहीं से मैसेज चला शिवपाल देंगे मंत्रिमंडल से इस्तीफा तो कहीं से मैसेज चले अखिलेश करेंगे राज्यपाल से विधानसभा भंग करने की सिफारिश। इसी बीच एक मैसेज और वायरल हुआ जो इस उठापठक में अमर सिंह का नाम भी ला रहा था। दरअसल, वायरल हुए उस मैसेज में एक वजह बताई गई संभवतः जिसके चलते ही अखिलेश ने मुख्य सचिव दीपक सिंघल को पद से हटाया ही नहीं बल्कि वेटिंग लिस्ट में डाल दिया। वायरल मैसेज साबित करता है कि अमर सिंह बीच की सुई हैं। दीपक सिंघल को भारी पड़ी अमर सिंह की दिल्ली दावत सोशल मीडया पर वायरल मैसेज में बताया गया है कि 11 सितम्बर को दिल्ली के एक बड़े होटल में अमर सिंह की दावत यहां के चीफ सेक्रेटरी दीपक सिंघल को भारी पड़ गयी। अमर की दावत में नेता, पत्रकार और अफसर सब शामिल हुए थे। मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव खास मेहमान थे। इसके अलावा इंडिया टीवी वाले रजत शर्मा, जी न्यूज वाले सुभाष चंद्रा सुधीर चौधरी और समाचार प्लस के उमेश कुमार भी आए थे। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तो इसमें शरीक नहीं थे लेकिन मुख्य सचिव दीपक सिंघल दलबल के साथ कायम थे। पार्टी का दौर शुरू हुआ और बातचीत का मुद्दा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बन गए। अमर सिंह ने अखिलेश की बुराई के तीर छोड़े तो इसमें सभी शरीक हो गए। सबने अखिलेश यादव की बुराई शुरू कर दी। वहां मौजूद मुख्य सचिव दीपक सिंघल भी कहां चुप रहने वाले थे। वो भी बोल गए कि यूपी में गलत फैसले तो हो ही रहे हैं। 


बहरहाल, पार्टी खत्म हुई। सब अपने-अपने घर गए। पार्टी में हुई बातचीत की सूचना मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक पहुंची। उन्हें बताया गया कि पूरा आयोजन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को नीचा दिखाने के लिए किया गया था और इस मोर्चाबाजी में मुख्य सचिव दीपक सिंघल भी शामिल थे। गुस्साए अखिलेश ने तुरंत फैसला लिया। दीपक सिंघल को अपदस्थ कर दिया गया। फिलहाल वो प्रतीक्षारत कर दिए गए हैं। मतलब, अमर सिंह की दावत यूपी ब्यूरोक्रेसी पर भारी पड़ गई है। अमर भी अखिलेश से हैं दुखी सियासत के जादूगर अमर सिंह की समाजवादी पार्टी में एक लम्बे जद्दोजहद के बाद वापसी हो तो गयी थी मगर उनके मनचाहे कामों को होने की वह स्थिति नहीं बन रही थी जो वह चाहते थे। अमर सिंह की बेचैनी इतनी बढ़ी थी की वे अपनी नाराजगी नहीं छुपा पा रहे थे और सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने और राज्यसभा से इस्तीफा देने की बात तक कह दी थी। अमर-शिवपाल की दोस्ती अमर सिंह और शिवपाल यादव की नजदीकियां छुपी हुई बात नहीं है। अमर सिंह की वापसी में भी शिवपाल की बड़ी भूमिका थी। दीपक सिंघल जैसे अफसर भी दोनों की पसंद थे। लेकिन, अपनी छवि को ले कर सतर्क अखिलेश ने अमर सिंह को एक हद से ज्यादा प्रभावी नहीं होने दिया। मतभेद खड़े करने में माहिर हैं अमर मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक अमर सिंह की विशेषता ही अपनो में मतभेद खड़ा करने की रही है। अमिताभ बच्चन से ले कर अंबानी परिवार तक इसका उदहारण है। अमर सिंह ने अपना बर्चस्व बढ़ने के लिए से ले कर परदे के पीछे शिवपाल के असंतोष को हवा देने में जुटे रहे और इसका नतीजा जब आया तो कुनबे से ले कर पार्टी और सरकार खतरे में आ गयी।


अधिक राज्य की खबरें