पाकिस्तान को आतंकी समूहों पर कसनी होगी लगाम: ख्वाजा आसिफ
अगर लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों पर लगाम नहीं लगाई गई तो देश शर्मिंदगी का सामना करता रहेगा।


इस्लामाबाद : पाकिस्तान ने भले ब्रिक्स घोषणापत्र को खारिज करते हुए कह दिया हो कि वह आतंकी संगठनों की सुरक्षित पनाहगाह नहीं है, लेकिन अब उसके अपने विदेश मंत्री ही उसकी पोल खोल रहे हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बुधवार को कहा कि अगर लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों पर लगाम नहीं लगाई गई तो देश शर्मिंदगी का सामना करता रहेगा। आसिफ का बयान ब्रिक्स घोषणापत्र के दो दिन बाद आया है जिसमें पहली बार पाकिस्तान से संचालित हो रहे आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधित संगठनों का नाम लिया गया था।

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भी हक्कानी नेटवर्क जैसे आतंकवादी समूहों को 'पनाह' देने के लिए पाकिस्तान को सार्वजनिक तौर पर कड़ी फटकार लगाई थी। आसिफ ने पाकिस्तान से संचालित लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद समेत अन्य प्रतिबंधित अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों के अस्तित्व को स्वीकार किया है। आसिफ ने मंगलवार को जियो न्यूज से बातचीत में कहा, 'हमें अपने मित्रों से कहने की आवश्यकता है कि हमने अपना बर्ताव सुधार लिया है। हमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी का सामना करने से बचने के लिये अपने तौर तरीके में सुधार करना है।' 

बता दें कि आसिफ बहुत जल्द चीन यात्रा पर जाने वाले हैं। इस लिहाज से भी उनके बयान को अहम समझा जा रहा है। आसिफ के अनुसार ब्रिक्स घोषणापत्र को चीन का आधिकारिक रुख नहीं समझा जाना चाहिये क्योंकि रूस, भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका भी समूह का हिस्सा हैं। 

श्यामन में ब्रिक्स घोषणा पत्र में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद को शामिल किया जाना पाकिस्तान के लिये झटका माना जा रहा है क्योंकि चीन ने पिछले साल गोवा में ब्रिक्स की बैठक में परिणामी दस्तावेज में पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों का नाम लिये जाने के प्रयासों को अवरुद्ध किया था। आसिफ ने कहा, 'मित्रों की हमेशा परीक्षा नहीं ली जानी चाहिये, खासतौर पर बदले हुए परिदृश्य में। इसकी बजाय हमें लश्कर और जैश जैसे तत्वों की गतिविधियों पर कुछ पाबंदी लगानी चाहिये ताकि हम विश्व समुदाय को दिखा सकें कि हमने अपने बर्ताव में सुधार किया है।'


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