क्या फिर 2019 में चलेगा मोदी का जादू?
पिछले कुछ समय से नोटबंदी, जीएसटी और अच्छे दिन को लेकर मोदी का भी मज़ाक उड़ाया जा रहा है.


नई दिल्ली : एक बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि सोशल मीडिया पर राहुल गांधी का सबसे ज़्यादा मज़ाक उड़ाया जाता है. लेकिन अभी पिछले कुछ समय से नोटबंदी, जीएसटी और अच्छे दिन को लेकर मोदी का भी मज़ाक उड़ाया जा रहा है.

जहां पहले साहसिक निर्णय व राष्ट्रवाद को लेकर एक विशेष तबका मोदी की तारीफ करता रहा है वहीं जीएसटी, पेट्रोल के दामों में बढ़ोत्तरी और कृषिगत समस्याओं की वजह से अब मोदी सरकार की मध्यम वर्ग के लोगों में छवि खराब हो रही है.

अभी अमित शाह ने वृंदावन में पार्टी की जो मीटिंग ली, उसमें आरएसएस से जुड़े कई संगठनों ने बताया कि जीएसटी की वजह से खेती, छोटे उद्योगों औऱ व्यापार पर बुरा प्रभाव पड़ा है.

अभी के हिसाब से उत्तर, मध्य व पश्चिम के राज्यों में बीजेपी की स्थिति अच्छी है लेकिन दक्षिण और पूर्व के राज्यों में स्थिति उतनी अच्छी नहीं है. सवाल ये है कि क्या इन राज्यों की कमी को 2019 के चुनाव में बीजेपी उत्तर के राज्यों से पूरी कर पाएगी. हालांकि 2016 के चुनाव में बीजेपी ने केरल और पश्चिम बंगाल में वोट के मामले में बढ़त बनायी है. औऱ फर्स्ट पास्ट द पोस्ट सिस्टम में कई बार कम वोटों का प्रतिशत भी अधिक सीटों में बदल जाता है. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कुल 30 फीसदी वोट पाकर भी  282 सीटें जीतीं, जबकि 1989 में 40 फीसदी वोट पाकर भी कांग्रेस को कुल 197 सीटें मिली थीं.

मौजूदा हालात में बीजेपी ने दलित व ओबीसी के बीच अपनी पैठ ज़रूर बनायी है लेकिन व्यापारी जो इसका परंपरागत वोटर था, वो इससे अलग होता हुआ दिखता है. ज़ाहिर है अभी जीएसटी को लेकर व्यापारी वर्ग कहीं असंतुष्ट सा है.

एक वरिष्ठ आरएसएस नेता का कहना है कि सरकार ने भ्रष्टाचार की लड़ाई में काले धन को रोकने के बजाय क्लीन कैश में लेनदेन की अर्थव्यवस्था को ही खत्म कर दिया.

सीकर में अभी हुए आंदोलन में किसान, मजदूर के साथ-साथ व्यापारी भी शामिल थे. ये भाजपा के लिए एक बड़ी चेतावनी है. क्योंकि ये दिखाता है कि भाजपा से सारे वर्ग नाखुश हैं. इसके अलावा डेरा सच्चा सौदा, पहलू खान व बीएचयू जैसी घटनाएं भी जनता के अंदर बीजेपी की छवि को खराब करती हैं. क्योंकि कानून व्यवस्था राज्य का विषय है .

हालांकि बीजेपी के साथ एक अच्छी बात ये है कि इसके पास मोदी जैसा अच्छा वक्ता है, अमित शाह जैसा चुनावी गणित बैठाने वाला पार्टी अध्यक्ष है और कमज़ोर विपक्ष है. राहुल गांधी ने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि मोदी चमत्कारी वक्ता हैं.

मन की बात से मोदी इस वक्त रेडियो के माध्यम से लगभग 27 करोड़ लोगों से जुड़ते हैं और अमित शाह की चुनावी रणनीति ने बड़े औऱ छोटे दोनों स्तरों पर बीजेपी को चुनाव जीतने में अभी तक मदद की है.

इसके अलावा बीजेपी ने उजाला योजना, जन-धन योजना, उज्जवला योजना जैसी कई योजनाएं चलाई हैं जिसने सरकार की छवि को बेहतर किया लेकिन नोटबंदी व जीएसटी के कारण जो समस्याएं उभरीं उन्होंने सरकार की छवि को धूमिल कर दिया है.

पर इन सबके ऊपर वर्तमान समय में बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत है कमज़ोर विपक्ष. 2004 की तरह कांग्रेस की अब वह स्थिति नहीं है कि विपक्ष इसके बैनर तले एकसाथ इकट्ठा हो सके. यहां तक कि कांग्रेस में ही राज्य स्तरीय प्रमुख नेताओं का भी विश्वास राहुल गांधी में उस तरह नहीं है जैसा सोनिया गांधी में हुआ करता था.

अब जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव को सिर्फ 18 महीने ही बचे हैं तो जीतने के लिए मोदी सरकार को दिखाना होगा कि उनकी नीतियां ज़मीनी स्तर पर काम कर रही हैं.


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