युवराज ने नेहरा को बताया एक सच्चा दोस्त
आशु बेबाक सच बोलता था


नई दिल्ली : आशीष नेहरा अब क्रिकेट से विदाई ले चुके हैं. उन्हें मिलने वाली शुभकामनाओं का दौर शुरू हो चुका है. हर कोई अपने अंदाज में उनके करिअर और व्यक्तित्व का आंकलन कर रहा है. नेहरा के बारे में एक भावुक कर देने वाला संदेश लिखा है युवराज सिंह ने. युवराज ने नेहरा को एक ‘सच्चा दोस्त’ और प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके क्रिकेट से संन्यास लेने को अपने लिये जज्बाती पल बताते हुए उनसे जुड़ी कई पुरानी यादें साझा की है.

साफ दिल का आदमी
''वो दिल का बहुत साफ आदमी है. सेलिब्रिटीज के बारे में आकलन करने के कई मानदंड होते हैं, लेकिन आशु बेबाक सच बोलता था और इसका उसने खामियाजा भी भुगता. मेरे लिये वह हमेशा आशु या नेहरा जी रहेगा जो दिलचस्प, ईमानदार और टीम भावना से भरा हुआ है. मैं पहली बार उससे अंडर 19 के दिनों में मिला, जब उसका भारतीय टीम में चयन हुआ था. वह हरभजन सिंह का रूममेट था. मैं भज्जी से मिलने गया था और मैने इस लंबे, छरहरे लड़के को देखा जो एक जगह चुपचाप नहीं बैठ सकता था. हमेशा कुछ ना कुछ करता रहता. बाद में जब हमने साथ खेला तो मैने उसे और करीब से जाना.

मैं सोचा करता था कि 38 बरस की उम्र में इतनी चोटों और आपरेशन के बाद यह इतनी तेज गेंद डाल सकता है तो मैं 36 बरस की उम्र में बल्लेबाजी क्यों नहीं कर सकता. इसी से मुझे आज भी प्रेरणा मिलती है. खुद कैंसर से जंग में जीतकर क्रिकेट के मैदान पर वापसी करने वाले युवराज ने लिखा, ‘आशु के 11 आपरेशन हो चुके हैं, लेकिन अपनी मेहनत और अच्छा खेलने की ललक से उसने वापसी की. विश्वकप 2003 के दौरान उसका टखना बुरी तरह से मुड़ गया था. वह इंग्लैंड के खिलाफ अगला मैच खेलने की स्थिति में नहीं था, लेकिन नेहरा जी ने कहा कि वह खेलना चाहते हैं. उसने अगले 72 घंटे में 30-40 बार अपने टखने पर बर्फ की सिकाई की और पेनकिलर खाये. उस मैच में उसने 23 रन देकर छह विकेट लिये और भारत ने इंग्लैंड को 82 रन से हराया.’ उन्होंने नेहरा के बेबाक रवैये की तारीफ करते हुए कहा कि वह बनावटी नहीं है. इसका उसने खामियाजा भी भुगता.
विश्वकप 2011 सेमीफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ उसने उम्दा गेंदबाजी की़ लेकिन घायल हो गया और फाइनल नहीं खेल सका. मैं जानता हूं कि ऐसी स्थिति में कई खिलाड़ी अपने में सिमट जाते या इसका रोना रोने लगते. लेकिन वह हमेशा हंसता रहता और सभी की मदद को तत्पर रहता. मुंबई में श्रीलंका के खिलाफ फाइनल के दौरान वह ड्रिंक्स, टावेल वगैरह का इंतजाम कराता. बाहर वालों को यह गैर जरूरी बात लगेगी लेकिन टीम खेल में जब सीनियर खिलाड़ी इस तरह मदद करता है तो बहुत अच्छा लगता है.  मेरे लिये यह जज्बाती पल है और उसके तथा उसके परिवार के लिये भी. मैं क्रिकेट का शुक्रगुजार हूं कि मुझे ऐसा सच्चा दोस्त दिया.''





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