जेमिमाह रोड्रिग्ज क्रिकेट की नई सनसनी, मारती है ऐसे शॉट्स लगता है हर बॉल जाएगी बाउंड्री पार
जेमिमा जब केवल 13 साल की थी तब उनका चयन अंडर-19 के लिए हो गया था.


नई दिल्ली : एक साल पहले तक 16 वर्षीय जेमिमाह रोड्रिग्ज का जीवन हॉकी एस्ट्रो टर्फ और क्रिकेट टर्फ के बीच घूम रहा था. उनकी सुबह मैदान में गोल करने से होती और शाम बल्लेबाजी की तकनीक सीखने से. दोनों टर्फ पर खेलते रहना संभव नहीं था. और पिछले साल उन्हें क्रिकेट को चुन लिया. क्रिकेट मैदान पर जेमिमाह ने एक बल्लेबाज के रूप में अपना नाम बनाना शुरू कर दिया. हालांकि, वह अंडर-17 और अंडर-19 महाराष्ट्र हॉकी टीम में भी चुनी जा चुकी थीं. लेकिन मुलुंड की रहने वाली इस किशोरी ने अंततः क्रिकेट को ही अपने जीवन का ध्येय चुना. 

रविवार को जेमिमाह ने अपने इस फैसला को उस समय न्यायसंगत ठहराया जब उन्होंने 50 ओवरों के एक मैच में महज 163 गेंदें खेलकर 202 रन बना डाले. वह स्मृति मंधाना के बाद दूसरी एक महिला खिलाड़ी बन गई, जिन्होंने दोहरा शतक जड़ा है. इससे पहले अंडर-19 में गुजरात के खिलाफ 142 गेंदों पर 178 रनों की पारी भी जेमिमाह खेल चुकी हैं. जेमिमा जब केवल 13 साल की थी तब उनका चयन अंडर-19 के लिए हो गया था. जाहिर है जेमिमाह ने रफ्तार से तरक्की की है. पिछले कुछ सालों में जेमिमाह लगातार अपने लिए जगह बनाती गई हैं. पहले वह अंडर-23 में चुनी गई और फिर मुंबई की टीम में. 

जेमिमाह कहती हैं, जब चुनाव का सवाल आया तो मैंने क्रिकेट को चुना, लेकिन सच यह भी है कि मुझे हॉकी खेलना भी बेहद पसंद है. लेकिन पिछले एक साल से मैं हॉकी नहीं खेली हूं. कभी सेंटर फॉरवर्ड खेलने वाली जेमिमाह कहती हैं कि उन्हें आज भी हॉकी से प्यार है. 

जेमिमाह के जीवन में क्रिकेट अनायास ही आया. उनके पिता ईवान रोड्रिग्ज क्लब क्रिकेट खेला करते थे. वह कई साल क्रिकेट कोच भी रहे. वह सेंट जोसफ स्कूल के इंचार्ज थे, जहां जेमिमाह ने स्कूली पढ़ाई की. वहीं जेमिमाह अपने भाइयों इनोच और एंडी को गेंदबाजी किया करती थीं. उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ती थी. 

वह कहती हैं, ''मुझे सचमुच कड़ी मेहनत करनी पड़ती थी. दो बार प्रेक्टिस और ट्रेनिंग सेशन. मैं सुबह 8 बजे जिम जाती, इसके बाद एमसीए-बीकेसी ग्राउंड पर प्रेक्टिस के लिए जाती. मेरा पूरा दिन प्रेक्टिस में ही गुजरता. मैं रात को 8 बजे घर पहुंचती हूं.''

सीनियर रोड्रिग्ज को अपनी बेटी पर गर्व है कि वह दो खेल शानदार ढंग से खेल  सकती हैं. वह कहते हैं कि, ''यह उनका सपना है कि उनकी बेटी देश का प्रतिनिधित्व करें चाहे हॉकी में या क्रिकेट में. हॉकी में आपको लगातार झुकना पड़ता, आपको स्टेमिना की जरूरत होती है. लेकिन दोनों ही खेलों में बेसिक्स एक सा है. आपको आर्म पावर और रिस्ट पावर की जरूरत होती है.''

बता दें कि जेमिमाह जब केवल 10 साल की थीं तब उन्हें महाराष्ट्र की हॉकी टीम  में चुन लिया गया था. उनके पिता को लगता था कि जेमिमाह हॉकी खिलाड़ी ही बनेगी. इसके बाद जेमिमाह को अंडर-16 लेवल में एमसीएक समर कैंप के लिए चुना गया. पिछले साल जेमिमा अंडर 19 में टॉप स्कोरर रहीं. उन्होंने 376 रन बनाए. उन्होंने छह मैचों में एक शतक और पांच अर्धशतक जमाए. उनकी कंसीस्टेंट परफोर्मेंस जारी रही. 

इंटर जोनल गेम्स में वेस्ट जोन के लिए 222 रन बनाए. वह कप्तान के साथ टीम की टॉप स्कोरर रही हैं. बाद में जेमिमा को गुंटुर में वन डे लीग की बेस्ट बल्लेबाज का खिताब मिला. 

जेमिमाह के पिता ने उनकी पढ़ाई को लेकर भी कोई समझौता नहीं किया. दसवीं में जेमिमाह ने 80 फीसदी अंक हासिल किए. उसके पिता कहते हैं कि मैं भाग्यशाली हूं कि जेमिमाह की 202 रनों की पारी देख पाया. स्मृति मंधाना के नक्शे कदम पर चल रही जेमिमाह के लिए अब नेशनल टीम से बुलावा बहुत दूर नहीं लगता. 

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