सईद अजमल को आज तक समझ में नहीं आया  कि सचिन को आउट क्यो नहीं दिया गया था
पहली बार 2009 में यूएई में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे मैच के दौरान उनके एक्शन की शिकायत की गई थी।


कराची : 5 साल से अधिक बीत गए, लेकिन पाकिस्तान के शीर्ष ऑफ स्पिनर सईद अजमल को आज तक समझ में नहीं आया कि विश्व कप 2011 के सेमीफाइनल में अंपायरों ने सचिन तेंडुलकर को उनकी गेंद पर नॉट आउट कैसे करार दिया था। 

40 बरस के अजमल ने हाल ही में क्रिकेट को अलविदा कहा है। मोहाली में पाकिस्तान के खिलाफ विश्व कप सेमीफाइनल में तेंडुलकर ने 85 रन बनाए थे। अजमल ने उन्हें आउट किया था। अजमल ने कहा, 'मैं आश्वस्त था कि वह LBW आउट थे, लेकिन आज तक मुझे समझ में नहीं आया कि अंपायरों ने उन्हें आउट क्यों नहीं दिया।' 

उन्होंने स्वीकार किया कि भारतीय बल्लेबाजों को गेंदबाजी करना आसान नहीं था। उन्होंने कहा, 'तेंडुलकर ऐंड कंपनी को गेंदबाजी करना हमेशा कौशल और क्षमता का परीक्षण होता था।' 

आईसीसी से नाराज 
पाकिस्तान के अनुभवी स्पिनर सईद अजमल ने भारी मन से क्रिकेट से संन्यास ले लिया, लेकिन जाते-जाते गेंदबाजी ऐक्शन के आकलन के आईसीसी के प्रोटोकॉल की आलोचना भी की। अपने सफल लेकिन विवादास्पद कैरियर में ऑफ स्पिनर अजमल ने 35 टेस्ट में 178 विकेट लिए। उन्होंने आखिरी टेस्ट 2014 में श्री लंका के खिलाफ गाले में खेला जहां उनके गेंदबाजी एक्शन की दूसरी बार शिकायत की गई। 

पहली बार 2009 में यूएई में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे मैच के दौरान उनके एक्शन की शिकायत की गई थी। अजमल ने संन्यास को लेकर कहा, 'अब युवा खिलाड़ियों को मौका देने का समय है। मुझे ऐसा लग रहा है कि घरेलू टीमों में भी मुझे बोझ माना जाने लगा है और मैं अपना सम्मान नहीं खोना चाहता।' 

उन्होंने कहा, 'मैं भारी मन से विदा ले रहा हूं क्योंकि मुझे लगता है कि आईसीसी का प्रोटोकॉल काफी कड़ा है। यदि आज अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे सभी गेंदबाजों का टेस्ट किया जाए तो कम से कम 90 प्रतिशत इसमें फेल हो जाएंगे।' उन्होंने कहा कि यदि पीसीबी ने आईसीसी के सामने उनका पक्ष और मजबूती से रखा होता तो उन्हें संतोष होता। 

उन्होंने कहा, 'मेरे गेंदबाजी ऐक्शन को अवैध करार दिए जाने के बाद बोर्ड ने मेरा साथ दिया, लेकिन आईसीसी के सामने इस प्रोटोकॉल को चुनौती देकर वे मेरा पक्ष और मजबूती से रख सकते थे।' 

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