टैग:#DuteeChand
ओलंपिक पदक जीतने के लिए दुती चंद ने बनाया 'विदेशी प्लान'
File Photo


एशियाई खेलों की दोहरी पदक विजेता स्प्रिंटर दुती चंद की नजरें टोक्यो ओलंपिक 2020 पर टिकी हैं और वो विदेश में ट्रेनिंग की तैयारी कर रही हैं. दुती ने कहा, ‘‘मेरा ध्यान हमेशा अपने निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में सुधार पर रहता है. देश में कुछ ही प्रतियोगिताएं होनी हैं जिसमें सीनियर फेडरेशन कप, सीनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिता और राज्य प्रतियोगिता शामिल है.’’

हाल ही में एशियाई खेलों में दो पदक जीतने वाली दुती ने कहा, ‘‘इसलिए सिर्फ इन तीन प्रतियोगिताओं की तैयारी करने और अच्छे विरोधियों की कमी को देखते हुए अच्छा समय नहीं मिलने वाला.’’ दुती चंद ने कहा, ‘‘अब राज्य सरकार ने घोषणा की है कि वो टोक्यो ओलंपिक की तैयारी में मदद करेगी जिसके बाद मैं देश से बाहर बड़ी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लूंगी जिससे कि बेहतर समय निकाल सकूं क्योंकि मेरा शरीर इसमें सक्षम है.’’

कौन हैं दुती चंद?
दुती चंद का जन्म ओडिशा के चाकागोपालपुर में हुआ था और उन्होंने महज 4 साल की उम्र में रनिंग शुरू कर दी थी. दुती चंद बेहद ही गरीब परिवार से ताल्लुक रखती थीं. उनका परिवार गरीबी रेखा के नीचे था. दुती के पिता एक बुनकर थे और रोजाना 10 रु. ही कमाते थे. दुती चंद अपनी बड़ी बहन सरस्वती को अपना आइडल मानती हैं. सरस्वती खुद भी एक एथलीट थीं और वो खुद दुती को प्रैक्टिस कराती थीं. दुती चंद महज 10 साल की उम्र में इंडिया नेशनल प्रोग्राम के तहत ट्रेनिंग शुरू कर दी थी. वो शुरुआती दिनों में नंगे पांव ट्रेनिंग करती थीं.

दुती चंद ने साल 2013 में स्कूल नेशनल गेम्स में टाटा नैनो कार जीती थी जिसके बाद उनका नाम नैनो पड़ गया. साल 2013 में ही वो नेशनल चैंपियन भी बनीं. आईएएएफ ने 2014 में अपनी हाइपरएंड्रोगेनिजम नीति के तहत दुती को निलंबित कर दिया था जिस वजह से उन्हें उस साल के कॉमनवेल्थ गेम्स के भारतीय दल से बाहर कर दिया गया था. इसके बाद दुती ने आईएएएफ के फैसले के खिलाफ खेल पंचाट में अपील दायर की और इस मामले में जीत दर्ज़ करते हुए वापसी की. दुती चंद के बैन के दौरान बैडमिंटन के महान खिलाड़ी और कोच गोपीचंद ने उनकी मदद की. गोपीचंद बैडमिंटन एकेडमी ने दुती चंद को प्रैक्टिस का मौका दिया और उनका पूरा खर्च उठाया.

अधिक खेल की खबरें