इन 6 कारणों से विवादित विधेयक बन गया था राजस्थान का 'काला कानून'
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जयपुर, विवादस्पद 'क्रिमिनल लॉ (राजस्थान अमेंडमेंट) बिल 2017' को विधानसभा में पेश कर चौतरफा घिरने के बाद राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार ने कानून को प्रवर समिति से सोमवार को वापस लेने की घोषणा कर दी. इस विवादित बिल को लेकर वसुंधरा राजे सरकार को कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा था. इस बिल के कानून बनने के बाद राज्य के किसी जज, मजिस्ट्रेट और सरकारी कर्मचारी के खिलाफ उनसे जुड़े किसी मामले में जांच से पहले संबंधित अधिकारियों से इजाजत लेना जरूरी होता.

राजस्थान विधानसभा में पिछले साल कांग्रेस ने बिल के खिलाफ जमकर हंगामा किया. वहीं, बीजेपी नेताओं ने भी विधायक दल की बैठक के साथ ही सदन में भी बिल का जमकर विरोध किया था. विधानसभा के बाहर मीडिया, सोशल मीडिया में भारी विरोध के बाद यह बिल देश भर में कई दिनों तक सुर्खियों में रहा. आखिर 'क्रिमिनल लॉ (राजस्थान अमेंडमेंट) बिल 2017' की निम्न 6 बातों की वजह से विरोध बढ़ता गया और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को विधानसभा में इसे प्रवर समिति से वापस लेने की घोषणा करनी पड़ी.

1. इस बिल का इसलिए विरोध हुआ, क्योंकि इससे नेताओं और अफसरों के खिलाफ आसानी से कार्रवाई नहीं हो पाती और ये उन्हें बचाने का ही काम करता.

2. इस बिल के कानून बनने के बाद मजिस्ट्रेट किसी केस की जांच की मंजूरी नहीं दे सकते. इसके लिए सरकार या विभाग के आला अधिकारियों की इजाजत लेनी होती. हालांकि, इसके लिए अधिकतम 6 महीने का वक्त तय किया गया था. इस दौरान अगर अफसर मंजूरी ना दे, तो इसे स्वीकृत मान लिया जाता.

3. केस पेंडिंग होने की स्थिति में किसी भी जज, मजिस्ट्रेट या सरकारी कर्मचारी का नाम, पता, फोटो और ऐसी कोई जानकारी नहीं दी जाती, जिससे संबंधित अधिकारी की पहचान उजागर हो. जो भी ऐसी जानकारियां उजागर करता, उसे 2 साल की सजा होती और जुर्माना भी लगाया जाता.

4. इस बिल के कानून का रूप लेने पर कोई भी चैनल, अखबार या वेबसाइट अधिकारियों के खिलाफ आरोपों पर खबर पब्लिश नहीं कर सकता, जब तक कि उस विभाग के आला अफसरों से इसकी मंजूरी नहीं मिल जाती.

5. सरकारी कामकाज से नाराज एक्टिविस्ट सरकार या संबंधित विभागों के खिलाफ पीआईएल फाइल करते हैं. इस बिल के कानून बनने के बाद इस काम में रूकावट आ सकती थी, क्योंकि नए बिल के लागू होने पर केस चलाए जाने से पहले सरकार या विभाग के जिम्मेदार अफसर अदालत में अपनी बात रख सकते थे.

6. इस बिल के कानून बन जाने से मीडिया के अधिकार कुछ हद तक सीमित हो जाते.

इसलिए इन वजहों से 'क्रिमिनल लॉ (राजस्थान अमेंडमेंट) बिल 2017' का लगातार विरोध किया गया. विवादित बिल को जयपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी.

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