पत्रकारों सावधान ! अख़बारों के दफ्तरों में घुसने की फिराक़ में हैं वो लोग
सोशल मीडिया पर मैसेज, रंगबिरंगी डिजाइन वाले पोस्टर के अलावा कार्ड के टुकड़े लिए दरबदल मारे-मारे घूम रहे हैं।


आपने भी सुना होगा! चोर जब चोरी के इरादे से रात में निकलते हैं तो उनके पास तरह-तरह की चाबियों का गुच्छा होता है। छोटा राॅड.. हथौड़ी..  इत्यादि होती है।
संवाददाता समिति का चुनाव जीतने के लिए विचार हैं नहीं। पत्रकारिता और पत्रकारों के लिए कभी कुछ नहीं किया। आगे कोई एजेंडा भी नहीं है। सोशल मीडिया पर मैसेज, रंगबिरंगी डिजाइन वाले पोस्टर के अलावा कार्ड के टुकड़े लिए दरबदल मारे-मारे घूम रहे हैं। 

पत्रकारिता के हित के लिए इन्होंने कभी ढेला भर भी कुछ नहीं किया। आगे कोई मकसद और जायज इरादे भी नहीं हैं । 
कुछ नहीं तो अपने कलम को हथियार बनाकर पत्रकारों के हक़ की लड़ाई लड़ी होती, वो भी नहीं किया। 

बतौर पत्रकार नेता अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। संवाददाता समिति के पद को अपने निजी कामों के लिए इस्तेमाल करेंगे। इस पद को हर जगह घुसने का गेट पास बनाना चाहते हैं ये चंद लोग। 

भले ही ये बड़े प्रसार वाले अखबारों के गेट से अच्छी तरह वाकिफ ना हों लेकिन हर अखबार/चैनल के आफिस में आज रात पीक आवर्स में घुसेगे भाई लोग। खबरें लिखने में मसरूफ पत्रकारों का समय नष्ट करेंगे। अपने प्रतिद्वंद्वियों की बुराई करेंगे और गिड़गिड़ा - गिड़गिड़ा कर वोट मांगेंगे। 
ध्यान दीजिएगा !  इनके पैनल साथ में चल रहे हैं, इसलिए ये झुंड में नज़र आयेंगे। 

सबसे मजेदार बात पर जरूर ग़ौर करियेगा। चोरों की चाबी के गुच्छे की तरह इनके झुंड में हर जाति-धर्म का एक-एक नुमाइंदा होगा। 
ब्राह्मण, क्षत्रिय, कायस्थ, मुसलमान... इत्यादि (सुना है जिस पैनल में मुसलमान प्रत्याशी नहीं है वहां उर्दू अखबारों में जाने के लिए एक मुस्लिम लड़का किराये पर बुलवा लिया जा रहा है।) 

पत्रकारिता सिर्फ खबर देने का नाम नहीं है। सच को सच और झूठ को झूठ साबित करने की मुहिम हैं। सामाजिक विकृतियों.. साम्प्रदायिक संकीर्णता और जातिवाद जैसी विकृतियां दूर करना भी पत्रकारिता का मकसद है। 

लेकिन नेतागीरी की हवस वाले चंद लोगों ने पत्रकारों के चुनाव को जातिवाद की गंदगी से भी गंदा करने की हर संभव कोशिश की है।  
एक अखबार के पत्रकार बताते हैं कि पीक आवर्स में वोट मांगने वाला एक झुंड (जातिगत कोलाज वाला पैनल) उनके अखबार के दफ्तर में घुसा। दफ्तर में बैठे मिश्रा जी से मुखातिब होने के लिए झुंड ने अपने पांडेय जी को आगे किया। 

चंद्रा जी खबर लिख रहे थे तो उन्हें श्रीवास्तव जी ने डिस्टर्ब किया। चौहान जी इस झुंड से बचना चाहते थे लेकिन वोट मांगने आये सिंह साहब बोले- ठाकुर साहब नमस्कार - नमस्कार। 

नासिर साहब की उंगलियां कम्प्यूटर पर दौड़ रहीं थी इतने में झुंड से एक असद साहब दौड़ते हुए आये और बोले- सलाम अलैकुम भाई जान। कौम की दुश्मन ताकतें फलां को जिताने में लगी हैं इसलिए उन्हें हराने के लिए ढमाका को हरा कर फलां.को जिताइयेगा। (गोयाकि संवाददाता समिति के चुनाव में फलां शख्स जीत गया तो कौम के सारे मसायल खत्म करा देगा। 

नोट:- इसमें सभी नाम काल्पनिक हैं। 

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