अखिलेश का हुआ मायावती जैसा हाल, 18 साल बाद सपा के सामने आई ऐसी स्थिति
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लखनऊ, करीब 18 साल बाद ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव किसी भी सदन के सदस्य नहीं होंगे. सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव वर्तमान में विधान परिषद के सदस्य हैं, जिनका कार्यकाल 5 मई को ख़त्म हो रहा है. अखिलेश ने उच्च सदन में भी खुद के बजाय प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम को भेजा है. यही स्थिति उनकी सहयोगी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मायावती की है, जो किसी भी सदन की सदस्य नहीं हैं.

दरअसल, अखिलेश यादव ने 2000 में कन्नौज लोकसभा उपचुनाव से अपने सियासी सफ़र की शुरुआत की थी. इसके बाद वे तीन बार सांसद चुने गए. 2012 में सपा की पूर्ण बहुमत की सरकार में अखिलेश यादव सूबे के मुख्यमंत्री बने और विधान परिषद के सदस्य चुने गए, लेकिन अब उनका कार्यकाल 5 मई को खत्म हो रहा है. अखिलेश अभी तक राज्य सभा और विधानसभा के सदस्य नहीं रहे हैं.

बता दें, अखिलेश यादव ने 2019 का लोकसभा चुनाव कन्नौज से लड़ने की इच्छा जाहिर की है. कन्नौज से उनकी पत्नी डिंपल यादव फिलहाल सांसद हैं. लिहाजा 2019 से पहले अखिलेश सरकार को किसी भी सदन में मौजूद नहीं होंगे, क्योंकि उन्होंने विधान परिषद नहीं जाने का फैसला किया है. कमोबेश यही स्थिति बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ है, जिन्होंने पिछले साल राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था.

विधान परिषद में 13 सदस्य होंगे निर्विरोध निर्वाचित

यूपी विधान परिषद में 13 सदस्यों का निर्विरोर्ध चुना जाना तय है. बीजेपी के 10 और उसके सहयोगी अपना दल (एस) से एक सदस्य उच्च सदन पहुंचेंगे. वहीं, सपा के समर्थन से बसपा के भीमराव अम्बेडकर और सपा के नरेश उत्तम पटेल विधान परिषद जाएंगे. बीजेपी के दो मंत्री महेन्द्र सिंह और मोहसिन रज़ा के अलावा सरोजिनी अग्रवाल, बुक्कल नवाब, यशवंत सिंह, जयवीर सिंह, विद्यासागर सोनकर, विजय बहादुर पाठक, अशोक कटारिया और अशोक धवन भी उच्च सदन जाएंगे. अपना दल के आशीष पटेल भी विधान सभा जाएंगे.


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