BSP से समझौते को लेकर सपा में तेज हुए बगावती सुर, अखिलेश पर लगा ये आरोप
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लखनऊ, यूपी में बीजेपी को रोकने के लिए महागठबंधन के लिए किसी भी त्याग को तैयार समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ पार्टी में ही बगावती सुर तेज होने लगे हैं. मैनपुरी में अखिलेश यादव के दिए गए बयान पर पार्टी नेताओं में असंतोष साफ दिखने लगा है.

पूर्व सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के करीबी और समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य डॉ. सीपी राय ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि सत्ता के लालच में अखिलेश समाजवादी आंदोलन को बर्बाद कर रहे हैं.

एक निजी न्यूज चैनल से बातचीत में डॉ. राय ने कहा कि असली समाजवादी अखिलेश के इस फैसले को कभी नहीं मानेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश बसपा के सामने झुककर अपने पिता का भी अपमान कर रहे हैं.

डॉ राय ने कहा, “पहली बात तो झुककर शब्द ही अपने आप में गलत है और आत्मघाती कदम है. हमारे जैसे लोग जिन्होंने शून्य से चलकर तमाम लोगों ने पार्टी को यहां तक खड़ा किया. वे तमाम कार्यकर्ता जिन्होंने इसमें अपनी आहुति दी. वे करोड़ों लोग जिन्होंने पार्टी को वोट देकर यहां तक पहुंचाया और मजबूत किया. ये उनके लिए दुखद समाचार है. सिर्फ सत्ता पाने के लालच में हम किस हद तक गिर सकते हैं.”

डॉ राय ने कहा कि अखिलेश सत्ता पाने के लिए बैसाखियों की तलाश क्यों कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव न तो पिता, चाचा, परिवार के लोग, पार्टी के वरिष्ठ नेता और न ही कार्यकर्ताओं से कोई बातचीत कर रहे हैं. अखिलेश उन सभी लोगों का अपमान कर रहे हैं जो समाजवादी आंदोलन से जुड़े रहे. वे लोग इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते जो पार्टी से पुराने समय से जुड़े रहे हैं और इसे मजबूत करने में अपना खून पसीना एक किया है.

उन्होंने कहा, “ठीक है गठबंधन का युग है. गठबंधन की आवश्यकता पड़ सकती है, लेकिन अपने को मजबूत करिए. मजबूत लोगों से समझौता होता है. कमजोर लोगों से समझौता नहीं होता. अगर कमजोर लोगों से समझौता होगा तो उसमें मान, सम्मान और इज्जत नहीं मिलती. डॉ. राय ने कहा कि उनके इस समझौते से मुलायम सिंह भी आहत हुए होंगे. वैसे तो उसी दिन आहत हो गए थे जब उन्हें बेइज्जत करके बाहर कर दिया गया. जिसका खामियाजा आज भी पार्टी भुगत रही है. अखिलेश ने अपनों को छोड़ दिया है, इसलिए उन्हें गैरों के कंधों पर सिर रखना पड़ रहा है. अगर अपनों के दुखों को सहलायेंगे तो उन्हें किसी और की बैसाखी का सहारा नहीं लेना पड़ेगा.

पार्टी में बगावत पर उन्होंने कहा कि मैं औरों की तरह नहीं हूं कि चुप रहूं. मैं राजनारायण का शिष्य रहा हूं, उन्होंने मुझे राजनीति में लाया. मेरे लिए खोने और पाने के लिए कुछ नहीं है. 32 साल मुलायम के साथ रहा, मुझे मिला ही क्या? लेकिन मैं समाजवादी पार्टी को बर्बाद करने की जो साजिश हो रही है उसके खिलाफ अंतिम सांस तक लडूंगा.

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