PM मोदी के दावे को मुंह चिढ़ाता है कोडरा गांव, खंभे लगे पर नहीं पहुंची बिजली
File Photo


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने चार साल की उपलब्धियों में देश के सभी गांवों में बिजली पहुंचाने को सबसे अहम मानते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में एक गांव ऐसा भी है जो उनके इस दावे को मुंह चिढ़ाती नजर आ रही है. सरकार का दावा कुछ भी हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे जुदा है.

बाराबंकी जिला मुख्यालय से 60 किलोमीटर दूर सीतापुर बार्डर पर स्थित घुंघटेर थाना क्षेत्र के कोडरा गांव में आजादी के 70 बाद भी बिजली नहीं पहुंची है. शाम ढलते ही पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है. गांव के बच्चे ढिबरी की रोशनी में अपने भविष्य के उजाले की तलाश में हैं. लोग अपनी बेटियों का रिश्ता भी इस गांव में नहीं करते. जिसकी वजह से गांव के लड़के कुंवारे ही हैं.

कोडरा ग्राम में विभाग ने खंभे लगाकर तार तो खींच दिए, लेकिन बिजली की रोशनी आजादी के इतने सालों बाद भी वहां नहीं पहुंची. ऐसा नहीं है कि इस क्षेत्र में बिजली का काम नहीं हुआ. हालांकि इस गांव से सटे आसपास के गांवों तक बिजली पहुंच चुकी है. लेकिन यहां बिजली पहुंचाने का काम साहब लोग भूल गए.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके मंत्रियों ने सरकार बनने के बाद शहरों को 24 घंटे और गांवों में 18 घंटे बिजली देने का दावा किया. सरकार ने ग्राम स्वराज अभियान जैसी तमाम योजनाओं के तहत यूपी के हर गांव और हर घर तक बिजली पहुंचाने का राग अलापा. लेकिन इसके बाद भी इस गांव की समस्या जस की तस बनी हुई है.

इस गांव के बच्चों की बात करें तो कोई डॉक्टर बनना चाहता है तो कोई इंजीनियर. लेकिन ऐसा तो तब संभव होगा जब ये पढ़ेंगे. लेकिन लालटेन और ढिबरी की रोशनी में भला पढ़ाई कैसे हो. इनका तो बस यही कहना है कि सरकार किसी तरह हमारे गांव में लाइट पहुंचा दे, ताकि हम भी पढ़ लिख कर कुछ बन सकें.

गांव में खंभे दो साल पहले ही लगे थे
बिजली की समस्या को लेकर गांव वालों का कहना है कि बिजली न होने की वजह से हमें बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. हम भी चाहते हैं कि हमारे बच्चे पढ़ लिखकर कुछ बनें. लेकिन हम अंधेरे में ही गुजारा करने को मजबूर हैं. दुनिया कहां से कहां पहुंच गई है. ऐसे में कैसे हमारे बच्चों का विकास होगा. हम शिकायत करते-करते थक चुके हैं, लेकिन हमारी कोई सुनने वाला नहीं. अब तो हमारे गांव में कोई अपनी लड़की ब्याहने को भी तैयार नहीं होता. जब कोई रिश्ता आता है तो गांव में बिजली न होने के चलते शादी करने से इनकार कर देता है.

वहीं, इस गांव में अब तक बिजली नहीं पहुंचने पर विभाग के अधिशासी अभियंता आरके मिश्र ने कहा कि ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है. मैं विभाग के अधिकारियों से इस बारे में जानकारी करवाकर पूरे मामले की जांच करवाऊंगा. साथ ही यह भी देखेंगे कि किस एजेंसी ने इस गांव में काम किया और अधूरा क्यों छोड़ा. कंपनी की भूमिका को देखते हुए उसे नोटिस भी दिया जाएगा कि बचे हुए काम को जल्द से जल्द पूरा कराएं.

अधिक राज्य की खबरें