...तो सपा-बसपा के इन 'नेताओं' के भरोसे 'गठबंधन' का तोड़ निकालेगी 'बीजेपी'
Mahendranath-pandey


जहां समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में गठबंधन करने में जुटी हैं, वहीं बीजेपी की निगाहें दोनों दलों के नाराज नेताओं पर टिकीं हैं. बीजेपी सपा व बसपा के उन नेताओं को अपने पाले में करने की तैयारी में है जो या तो चुनाव हार गए हैं या जिन्हें टिकट नहीं मिलेगा. यूपी बीजेपी अध्यक्ष डॉ महेंद्रनाथ पांडेय के मुताबिक जब गठबंधन में सीट शेयरिंग और टिकट बंटवारा होगा तब काफी बड़ी संख्या में दोनों ही दलों के कई नेता नाराज रहेंगे. बीजेपी उन नाराज नेताओं को अपने पाले में करने की कोशिश करेगी.

पाण्डेय ने कहा, " ऐसा नहीं है कि टिकट वितरण के समय बीजेपी के नेता नाराज नहीं होंगे. लेकिन हमारे नेता सपा और बसपा के नेताओं से कहीं ज्यादा अनुशासित और समर्पित हैं. 1993 में भी जब सपा और बसपा के बीच गठबंधन हुआ था तब बीजेपी को 176 सीट मिली थी और गठबंधन को 172. 2019 के चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन 2014 के लोकसभा चुनाव से भी बेहतर होगा."

कैराना व नूरपुर उपचुनावों में हार और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भीम आर्मी के बढ़ते प्रभाव पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, "हम सभी चीजों की बारीकी से समीक्षा कर रहे हैं. यह भी देख रहे हैं कि भीम आर्मी से कैसे निपटना है. भीम आर्मी बसपा के भी खिलाफ है. यह स्थिति पार्टी के लिए अच्छी है. इसके अलावा हम संगठन में दलितों और पिछड़ों की भागीदारी बढ़ाने जा रहे हैं. जिसका फायदा हमें 2019 के लोकसभा चुनाव में मिलेगा."

पांडेय ने कहा कि उपचुनाव में हार का असर 2019 के लोकसभा परिणामों पर नहीं पड़ेगा. उपचुनावों में हमेशा स्थानीय मुद्दे हावी होते हैं लेकिन लोकसभा चुनाव राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में लड़ा जाता है और पीएम कोडी हमारे चेहरा होंगे. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की उज्जवल गैस कनेक्शन, आयुष्मान भारत, सौभाग्य योजना और मुद्रा बैंक जैसी विकास योजनाएं हमारे लिए 2019 में ट्रम्प कार्ड होगी.

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