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ये कैसा विकास? झांसी के इस गांव को 200 सालों से है एक पुल का इंतजार
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सरकार विकास का कितना भी दावा करे लेकिन बुंदेलखंड के झांसी जनपद में एक गांव ऐसा है जो विकास से कोसों दूर है. झांसी के इस गांव के लोगों को पिछले 200 सालों से नदी पर एक पुल का इंतजार है. चुनावी मौसम में सभी दलों के नेता आते हैं और पुल बनाने के वादा करते हैं, लेकिन आज तक किसी सरकार ने इस गांव की समस्या पर ध्यान नहीं दिया.

बुंदेलखंड में विकास को लेकर बड़े-बड़े दावे तमाम सरकारों ने किए. विकास को लेकर करोड़ों अरबों रुपए पानी की तरह सरकारों ने बहा दिए. बावजूद इसके बुंदेलखंड में आज भी ऐसी कई बानगियां हैं, जो ये बताने के लिए काफी हैं कि यहां आज भी विकास के दावे कोरे ही साबित हो रहे हैं. बबीना विधान सभा के पारीक्षा गांव से उजयन गांव जाने के लिए बेतवा नदी पर ग्रामीणों को एक अदद पुल नसीब नहीं हो पाया.

तकरीबन 2 हजार की आबादी वाले उजयन गांव के ग्रामीण 200 साल से भी ज्यादा का समय बीत जाने के बाद आज भी हर रोज जान जोखिम में डालकर बेतवा नदी का आधा किलोमीटर का सफर सकरी नाव में तय करते हैं. नदी पर पुल बनने का सपना ग्रामीणों के लिए अब सपना ही बनकर रह गया है.
आलम यह है कि आधे किलोमीटर के सफ़र को तय करने के लिए ग्रामीणों को अपनी मोटरसाइकिल और साइकिल को नाव पर लादकर ले जाना पड़ता है. ग्रामीण बताते हैं कि ऐसा उनके दादा और परदादा के समय से होता आ रहा है. नदी पार करने के लिए नाव ही एक सहारा है. रोजाना दो हजार आदमी नाव से नदी पार करते हैं. उनका कहना था कि हादसे का डर हमेशा लगा रहता है. 1994 में हुई नाव दुर्घटना में 50 लोगों की जान गई थी.

ग्रामीण कहते हैं चुनावी समय में सभी दलों के नेता आते हैं और वादा करते हैं कि वोट दो पुल बनवा देंगे, जीत जाने के बाद कोई नहीं आता. पढ़ लिखकर अपना भविष्य बनाने वाले बच्चों का इस बाबत कहना था कि पढ़ना है तो इस तरह के खतरे उठाने ही पड़ते है, क्योंकि गांव आने जाने का नांव ही एक मात्र विकल्प है.


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