संक्रामक बुखार की गिरफ्त में यूपी के शहर, नहीं रुक रहा मौत का सिल‍सिला
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लखनऊ, भारत अन्य देशों की अपेक्षा सस्ते और बेहतर इलाज के लिए दुनिया में मेडिकल हब के रूप में उभर रहा है. लेकिन देश का सबसे बड़ा सूबा उत्तर प्रदेश इन दिनों संक्रामक बुखार से तप रहा है. वायरल फीवर, मलेरिया और डेंगू से अब तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सरकारी से लेकर प्राइवेट अस्पताल तक सभी मरीजों से भरे हैं. संक्रामक बुखार से हो रही लगातार मौतों की वजह से यूपी के शहर-शहर में हाहाकार मचा हुआ है. वहीं स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.

अभी तक प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक पिछले करीब एक महीने में बरेली जिले में 140 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें ज्यादातर बच्चे ही हैं. हालांकि स्वास्थ्य विभाग मौतों का आंकड़ा 25 बता रहा है. बदायूं जिले में 119 लोग वायरल फीवर, मलेरिया और डेंगू की वजह से काल के गाल में समा चुके हैं. जबकि बुखार से पीड़ित मरीजों का अस्पताल पहुंचने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है.

उधर, हरदोई में 30 से अधिक की मौत हो चुकी है, जबकि विभाग मौतों की संख्या सिर्फ 12 बता रहा है. बहराइच में पिछले एक महीने में 110 से ज्यादा मौतों की खबर है, लेकिन विभाग के मुताबिक यह आंकड़ा 70 का है. राजधानी लखनऊ से सटे सीतापुर जिले में दो दर्जन गांव संक्रामक बुखार से पीड़ित हैं. जिले में अब तक 35 लोगों की जान जा चुकी है. आलम यह है कि लोग बुखार के डर से पलायन करने को मजबूर हैं. बाढ़ से प्रभावित कौशाम्बी जिले में पिछले चार दिनों में डेढ़ सौ से ज्यादा मरीज अस्पताल में भर्ती हुए हैं. जिले में अभी तक तीन बच्‍चों समेत पांच की मौत हो चुकी है. संगमनगरी इलाहाबाद की बात करें तो यहां भी बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. जिले में अभी तक डेंगू के 13 संदिग्ध मरीज मिले हैं. डेंगू के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए तेज बहादुर सप्रू यानी बेली अस्पताल में स्पेशल वार्ड बनाया गया है. हालांकि तीमारदार अस्पताल में अच्छी सुविधा की बात तो कह रहे हैं, लेकिन डॉक्टरों के निरीक्षण को लेकर सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि वार्ड डॉक्टर समय से निरीक्षण के लिए नहीं आ रहे हैं. हालांकि, सीएमएस का कहना है कि अस्पताल में दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक है. मरीजों की सभी सुविधाएं दी जा रही हैं.

स्वास्थ्य विभाग पर खड़े हो रहे सवाल
यूपी के बाढ़ प्रभावित जिलों में संक्रामक बीमारियों के फैलने का अंदेशा पहले से ही था. लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इस ओर कोई कदम नहीं उठाया. न ही फोगिंग की गई और न ही मलेरिया और डेंगू के लार्वा की जांच की गई. सीतापुर, हरदोई, बरेली और बदायूं में लोगों ने कहा कि पहले तो कोई गांव में पहुंचा ही नहीं और जब मरीजों की संख्या बढ़ने लगी तो मामलों को दबाने का प्रयास किया गया. हालात बेकाबू होने के बाद स्वास्थ्य विभाग जागा. खबर मीडिया में आने के बाद राज्य और सेंटर की टीम ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया. डॉक्टरों की टीम गांवों में डेरा जमाए हुए है.

मलेरिया और डेंगू के मरीज ज्यादा

जांच में ज्यादातर मरीज मलेरिया और वायरल फीवर के हैं. मलेरिया के मरीजों की संख्या 40 से 50 फ़ीसदी है. वहीं, कई मरीज डेंगू के भी मिले हैं. बदायूं के जगत क्षेत्र में सोमवार को भर्ती किए गए 100 मरीजों में से 35 मलेरिया के थे.

विपक्ष ने स्वास्थ्य मंत्री पर खड़े किए सवाल

बदायूं से समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने बुखार के कहर के लिए सरकार और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि सरकार लोगों के प्रति संवेदनशील नहीं है. बुखार के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं और स्वास्थ्य महकमा लापरवाह बना हुआ है.

हालांकि, स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि बुखार से प्रभावित जिलों में स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट किया गया है. सभी जिला अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ाई गई है. रैपिड एक्शन टीम का गठन किया गया है. जो सूचना पर तत्काल पहुंच कर मरीजों की जांच और इलाज मुहैया करा रही है. डीजी ऑफिस में कण्ट्रोल रूम बनाया गया है. इसके जरिए डेली बेसिस पर मॉनिटरिंग की जा रही है.
उन्होंने कहा कि बुखार से प्रभावित जिले में फॉगिंग की जा रही है. साथ ही अन्य विभागों जैसे नगर से भी मदद ली जा रही है, क्योंकि संक्रामक बीमारी की वजह गन्दगी है.

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