यूपी में पेंशन का टेंशन: जानिए क्या है पुरानी व्यवस्था और NPS में अंतर?
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उत्तर प्रदेश के सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों में पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली की मांग को लेकर आंदोलन तेज होता दिख रहा है. लखनऊ के ईको गार्डन में मंगलवार को जोरदार प्रदर्शन के बाद कर्मचारी नेताओं की सरकार की तरफ से डिप्टी सीएम से बात हुई. लेकिन कोई लिखित आश्वासन नहीं मिलने के बाद वार्ता विफल हो गई. अब हड़ताली कर्मचारियों ने ऐलान कर दिया है कि 25 से 27 अक्टूबर तक प्रदेश भर में हड़ताल होगी.

दरअसल कर्मचारियों की मांग है कि 1 अप्रैल 2005 से लागू न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) की जगह पुरानी व्यवस्था को लागू किया जाए, ताकि रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी के परिवार का भविष्य सुनिश्चित हो सके. इनका विरोध मुख्य रूप से नई पेंशन स्कीम की शेयर मार्केट पर आधारित व्यवस्था को लेकर है. अटेवा-पुरानी पेंशन बचाओ मंच यूपी के मीडिया प्रभारी राजेश यादव कहते हैं कि न्यू पेंशन स्कीम एक म्‍यूचुअल फंड की तरह है जिससे कर्मचारियों को कोई फायदा नहीं हो रहा है.


जानिए क्या है पुरानी और नई पेंशन स्कीम में अंतर और क्या हैं विरोध के कारण

पुरानी पेंशन व्यवस्था
— पुरानी पेंशन व्यवस्था का शेयर मार्केट से कोई संबंध नहीं था.

— पुरानी पेंशन में हर साल डीए जोड़ा जाता था.

— पुरानी पेंशन व्यवस्था में गारंटी थी कि कर्मचारी या अधिकारी की आखिरी सैलरी का लगभग आधा उसे पेंशन के तौर पर मिलेगा.

— अगर किसी की आखिरी सैलरी 50 हजार है तो उसे 25 हजार पेंशन मिलती थी. इसके अलावा हर साल मिलने वाला डीए और वेतन आयोग के तहत वृद्धि की सुविधा थी.

— नौकरी करने वाले व्यक्ति का जीपीएफ अकाउंट खोला जाता था.

— जीपीएफ एकाउंट में कर्मचारी के मूल वेतन का 10 फ़ीसदी कटौती करके जमा किया जाता था.

— जब वह रिटायर होता था तो उसे जीपीएफ में जमा कुल राशि का भुगतान होता था.

— सरकार की तरफ से आजीवन पेंशन मिलती थी.

नई पेंशन व्यवस्था

— 1 अप्रैल 2005 से लागू हुई न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस)

— न्यू पेंशन स्कीम एक म्‍यूचुअल फंड की तरह है. ये शेयर मार्केट पर आधारित व्यवस्था है.

— पुरानी पेंशन की तरह इसमेें पेंशन में हर साल डीए नहीं जोड़ा जाता.

— कोई गारंटी नहीं है कि कर्मचारी या अधिकारी की आखिरी सैलरी का लगभग आधा ही उसे पेंशन के तौर पर मिले.

— एनपीएस के तहत जो टोटल अमाउंट है, उसका 40 प्रतिशत शेयर मार्केट में लगाया जाता है.

— कर्मचारी या अधिकारी जिस दिन वह रिटायर होता है, उस दिन जैसा शेयर मार्केट होगा, उस हिसाब से उसे 60 प्रतिशत राशि मिलेगी. बाकी के 40 प्रतिशत के लिए उसे पेंशन प्लान लेना होगा.

— पेंशन प्लान के आधार पर उसकी पेंशन निर्धारित होगी.

— नई व्यवस्था में कर्मचारी का जीपीएफ एकाउंट बंद कर दिया गया है.

विरोध इन बातों पर है

— 1 जनवरी 2004 को जब केंद्र सरकार ने पुरानी व्यवस्था को खत्म कर नई व्यवस्था लागू की. एक बात साफ थी कि अगर राज्य चाहें तो इसे अपने यहां लागू कर सकते हैं. मतलब व्यवस्था स्वैच्छिक थी. यूपी में इसे 1 अप्रैल 2005 को लागू कर दिया. पश्चिम बंगाल में आज भी पुरानी व्यवस्था ये लागू है.

— पुरानी पेंशन व्यवस्था नई व्यवस्था की तरह शेयर बाजार पर आश्रित नहीं है. लिहाजा उसमें जोखिम नहीं था.

— न्यू पेंशन स्कीम लागू होने के 14 साल बाद भी यह व्यवस्था अभी तक पटरी पर नहीं आ सकी है.

— नई स्कीम में कोई गारंटी नहीं है कि कर्मचारी या अधिकारी की आखिरी सैलरी का लगभग आधा ही उसे पेंशन के तौर पर मिले. क्योंकि शेयर बाजार से चीजें तय हो रही हैं.

— नई व्यवस्था के तहत 10 प्रतिशत कर्मचारी और 10 प्रतिशत सरकार देती है. लेकिन जो सरकार का 10 प्रतिशत का बजट है, वही पूरा नहीं है.

— मान लीजिए यूपी में मौजूदा समय में 13 लाख कर्मचारी है. अगर उनकी औसत सैलरी निकाली जाए तो वह 25 हजार के आसपास है. इस हिसाब से कर्मचारी का 2500 रुपए अंशदान है. लेकिन इतना ही अंशदान सरकार को भी करना है. मोटे तौर पर सरकार के ऊपर कई हजार करोड़ का भार आएगा. लेकिन सरकार के पास इसके लिए बजट ही नहीं है.

— नई व्यवस्था के तहत मान लीजिए अगर किसी की पेंशन 2000 निर्धारित हो गई तो वह पेंशन उसे आजीवन मिलेगी. उसमें कोई उतार-चढ़ाव नहीं होगा. पुरानी व्यवस्था में ऐसा नहीं था. उसमें हर साल डीए और वेतन आयोग के तहत वृद्धि की सुविधा थी.

— विरोध शेयर मार्केट आधारित व्यवस्था को लेकर है. कर्मचारियों का कहना है कि मान लीजिए कि एक कर्मचारी एक लाख रुपये जमा करता है. जिस दिन वह रिटायर होता है उस दिन शेयर मार्केट में उसके एक लाख का मूल्य 10 हजार है तो उसे 6 हजार रुपये मिलेंगे और बाकी 4 हजार में उसे किसी भी बीमा कंपनी से पेंशन स्कीम लेनी होगी. इसमें कोई गारंटी नहीं है.

— पहले जो व्यवस्था थी, उसमें नौकरी करने वाले व्यक्ति का जीपीएफ अकाउंट खोला जाता था. उसमें कर्मचारी के मूल वेतन का 10 फ़ीसदी कटौती करके जमा किया जाता था. जब वह रिटायर होता था तो उसे जीपीएफ में जमा कुल राशि का भुगतान होता था और सरकार की तरफ से आजीवन पेंशन मिलती थी. नई व्यवस्था में जीपीएफ अकाउंट बंद कर दिया गया है.

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