बुलंदशहर हिंसा: योगेश ने गोकशी की जो कहानी सुनाई, वो झूठी है?
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बुलंदशहर में बीते सोमवार को हुई हिंसा के पीछे बजरंग दल और कई अन्य संगठनों ने गोकशी का आरोप लगाया है. इस हिंसा में मारे गए यूपी पुलिस के इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी योगेश राज ने भी एक FIR दर्ज कराई है, जिसमें 3 दिसंबर की सुबह गोकशी होते देखे जाने का दावा किया है. हालांकि यूपी पुलिस के आईजी क्राइम एसके भगत ने इस कहानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

क्या कह रहा योगेश ?
पुलिस ने योगेश राज की शिकायत पर सोमवार को 7 गोकशों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था. योगेश राज ने सोमवार को स्‍याना पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि वह अपने कुछ साथियों के साथ सोमवार सुबह करीब नौ बजे गांव महाब के जंगलों में घूम रहा था. इसी दौरान उसने नयाबांस के आरोपी सुदैफ चौधरी, इलियास, शराफत, परवेज, (दो नाबालिग) और सरफुद्दीन को गोवंशों को कत्ल करते हुए देखा, इसके बाद उन्‍होंने शोर मचा दिया और आरोपी भाग निकले.

आईजी ने उठाए सवाल?
यूपी के आईजी क्राइम एसके भगत ने योगेश राज की FIR में दर्ज कहानी पर सवाल खड़ा कर दिया है. भगत ने बुधवार देर शाम पत्रकारों से बातचीत में कहा जानकारी दी है कि घटनास्थल से जो मांस और हड्डियों के टुकड़े बरामद किए गए हैं वो शुरूआती जांच में 48 घंटे पुराने मालूम होते हैं. इसके आलावा फिलहाल इसके गोमांस होने की भी पुष्टि नहीं हुई है. इसका मतलब ये हुआ कि अगर कोई जानवर काटा भी गया है तो वो 1 दिसंबर की शाम की घटना है. जबकि योगेश का दावा है कि उसने 3 दिसंबर की सुबह 9 बजे गोकशी होते देखी थी.

FIR पर कई और सवाल भी उठे
बता दें कि जिन 7 आरोपियों के नाम FIR में हैं इनमें से दो नाबालिग बच्चे हैं जिनकी उम्र 11 और 12 साल बताई जा रही है. एक नाबालिग बच्चे के पिता का कहना है कि उनको पुलिस थाने ले गई है और परेशान कर रही है. दूसरा आरोपी बच्चा भी इसी शख्स का भतीजा बताया जा रहा है. आरोपी बच्‍चे के पिता ने दोनों का आधार कार्ड भी दिखाया है हालांकि इस मामले में सयाना पुलिस कुछ भी कहने से बच रही है.

इसके अलावा मामले को लेकर एक आरोपी शराफत को लेकर छानबीन करने पर सामने आया है कि उन्होंने दस साल पहले ही गांव छोड़ दिया था. शराफत अब फरीदाबाद में रहते हैं और कई साल से गांव ही नहीं आए हैं. एफआईआर में लिखा गया है कि सातों लोग नयाबांस गांव के ही निवासी हैं हालांकि गांव वालों का कहना है कि इनमें से कई लोग या तो बहुत पहले गांव छोड़कर चले गए हैं या फिर इस मामले से उनका कोई लेना देना ही नहीं है.

यूपी डीजीपी ने भी उठाया सवाल
यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ओपी सिंह ने भी बुधवार को इस पूरे मामले पर सवाल उठाया है कि 'बुलंदशहर हिंसा एक बड़ा षडयंत्र था. वहां जो हुआ, वह सिर्फ लॉ ऐंड ऑर्डर का मुद्दा नहीं था, बल्कि साजिश थी. वहां पर गायें कैसे पहुंचीं? उन्हें कौन और क्यों लाया था? किन परिस्थितियों में वे पाई गईं? कई सारे सवाल इस घटना को लेकर उठ रहे हैं. इस घटना को 6 दिसंबर से पहले अंजाम दिया गया और इससे साजिश की बू आ रही है.

गौरतलब है कि 3 दिसंबर को गोकशी की एक अफवाह के बाद सैंकड़ों लोग सड़क पर आ गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे. योगेश राज भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे. स्‍याना कोतवाली के प्रभारी सुबोध कुमार सिंह ने उसे समझाने की कोशिश की लेकिन वह नहीं माना. इसके बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया. इस पर भीड़ हिंसक हो गई और इसी दौरान किसी ने गोली मारकर सुबोध कुमार की हत्‍या कर दी. योगेश राज पहले एक प्राइवेट नौकरी करता था. 2016 में योगेश बजरंग दल का जिला संयोजक बना. उसके बाद नौकरी छोड़कर पूरी तरह संगठन के लिए काम करने लगा. पुलिस ने उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 307, 302, 333, 353, 427, 436, 394 के तहत मामला दर्ज किया है.

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