ANALYSIS: सपा-बसपा गठबंधन में सीटों की घोषणा में कहां फंसा है पेंच
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उत्तर प्रदेश में बसपा सुप्रीमो मायावती और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के साझा प्रेस कांफ्रेंस के बाद गठबंधन में सीटों का गणित तो साफ हो गया, लेकिन अहम सवाल यह है कि कौन सी सीट किस पार्टी के खाते में गई है और वहां से उम्मीदवार कौन होगा इसका ऐलान कब होगा. मायावती की पहचान एक ऐसे नेता की रही है जो चुनाव से वर्षों पहले उम्मीदवार घोषित कर देती हैं.

ऐसे में सबको उम्मीद थी कि माया जब अपने जन्मदिन 15 जनवरी को मीडिया के सामने आएंगी तो उम्मीदवारों का नाम भले न बताएं लेकिन सीटों का ऐलान तो जरूर कर देंगी, लेकिन मायावती ने ऐसा कुछ नहीं किया. साफ है गठबंधन में अभी भी कुछ पेंच फंसा है. बसपा और सपा के करीबी सूत्रों की मानें  तो मुश्किल बड़ी नहीं है लेकिन दोनों के पार्टी कैडर को समझाना बड़ी चुनौती है.

पिछले चार साल से लोकसभा चुनाव की तैयारी कर रहे नेताओं को समझाना आसान नहीं है. ऐसे में आनन-फानन में सीटों का ऐलान करने से दोनों पार्टियों में भगदड़ जैसे हालात पैदा हो जाएंगे. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का कैडर भले ही पार्टी छोड़ने से पहले सोचे, लेकिन शिवपाल यादव के अलग होने के बाद समाजवादी पार्टी में भगदड़ का खतरा ज्यादा है. ऐसे में दोनों दल सीटों की घोषणा से पहले उन बड़े नेताओं को समझाना चाहते हैं जिनकी सीट गठबंधन के कारण सहयोगी दल के खाते में जा रही है.

गठबंधन का गणित देखें तो बसपा के खाते के लिए उन 4 सीटों की पहचान भी करनी हैं जहां वह नंबर दो नहीं रही थी क्योंकि बसपा सिर्फ 34 सीटों पर नंबर दो रही थी, यानी कांग्रेस जिन 6 सीटों पर नंबर 2 रही थी, उनमें 4 बीएसपी के खाते में जाएंगी जबकि 2 समाजवादी पार्टी के खाते में. क्योंकि सपा ने पिछले लोकसभा चुनाव में 5 सीटें जीती थी, जबकि 31 सीटों पर वह नंबर दो रही थी.

दोनों दल गठबंधन की सीटों का ऐलान करने के पहले आरएलडी के साथ-साथ अन्य सहयोगी दलों से अंतिम दौर की बातचीत कर लेना चाहते हैं. दोनों दल उन नेताओं पर भी अभी तक फैसला नहीं ले पाए हैं, जो नेता एक पार्टी से दूसरी पार्टी में शामिल हुए हैं. साफ है गठबंधन में किस पार्टी के खाते में कौन सी सीट गई है, यह जानने के लिए दोनों दलों को अभी और इंतजार करना होगा.

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