नाटक अंधायुग के मंचन की तैयारियां पूरी, सोमवार को होगा मंचन
निर्देशक अलोपी वर्मा बताते हैं कि, अंधा युग एक दृश्य काव्य है, मतलब यह नाट्य विधा में लिखी गयी रचना है जिसके संवाद और नेपथ्य से उद्घोषणाएं काव्यात्मक हैं।


लखनऊ : हिन्दी के कालजयी नाट्य रचनाओं में से एक साहित्यकार स्व. धर्मवीर भारती लिखित नाटक अंधायुग का मंचन आगामी सोमवार 18 मार्च को कलामंडपम प्रेक्षागृह, कैसरबाग में किया जाएगा।



नाटक के मंचन हेतु समस्त तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। नाटक का पूर्वाभ्यास भी अब अपने अंतिम चरण में हैं। नाटक को लेकर कलाकार उत्साह में है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) से स्नातक एवं राष्ट्रीय ख्यातिलब्ध वरिष्ठ रंगकर्मी, नाट्य निर्देशक अलोपी वर्मा के निर्देशन में अपनी अभिनय क्षमता को धार दे रहे कलाकारों ने कहा कि हिन्दी साहित्य की अमूल्य धरोहर अंधायुग के मंचन का हिस्सा बनने पर उन्हें गर्व का अनुभव हो रहा है।
विदित हो कि महाभारत युद्ध के अंतिम दिन की कथावस्तु पर आधारित इस नाटक में समाज के विद्रूप चेहरे को उजागर करते हुए दर्शाया गया है कि जीवन की अच्छाइयों के प्रति आस्था कभी का कभी लोप नहीं होता।



 निर्देशक अलोपी वर्मा बताते हैं कि, अंधा युग एक दृश्य काव्य है, मतलब यह नाट्य विधा में लिखी गयी रचना है जिसके संवाद और नेपथ्य से उद्घोषणाएं काव्यात्मक हैं। ज्यादातर संवाद मुक्त-छंद और तुकांत कविता का मिश्रण हैं। शायद काव्यात्मक संवाद का चुनाव इसलिए किया गया क्योंकि सामान्य जनमानस के लिए पद्य समझना और कंठस्थ करना, गद्य की तुलना में कहीं आसान होता है।



उन्होने बताया कि, अंधा युग में मनुष्य की भावनाओं का सजीव चित्रण किया गया है। कृष्ण ने अर्जुन को भले ही गीता में सत्य के लिए युद्ध करने का सन्देश दिया हो लेकिन युद्ध में भयानक विध्वंस देखकर सभी का मन खिन्न हो गया था। धृतराष्ट्र और गांधारी यह जानते हुए भी कि उनके पुत्र धर्म की तरफ से युद्ध नहीं कर रहे हैं, अपने पुत्रों की जीत की आस लगा रखे थे। यह उनकी ममता थी। अश्वत्थामा प्रायश्चित और बदले की भावना में जल रहा था। पूरे हस्तिनापुर में एक निराशा का वातावरण था। जिन्होंने पहले राज्य का वैभव देखा था, अब राज्य का पराभव देख रहे थे। 



उनके माध्यम से धर्मवीर भारती जी ने संभ्रांत वर्ग के निर्णयों का वंचितों पर पड़ने वाले प्रभावों के साथ ही युद्ध के वीभत्स चेहरे को भी नाटक में भारती जी ने बहुत अच्छे से चित्रित किया है। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से प्रस्तुत होने वाले इस नाटक में शहर के परिचित रंगकर्मियों सहित कई नवोदित कलाकार भी हिस्सा ले रहे हैं।

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