उपभोक्ता फोरम के खिलाफ हाईकोर्ट जाएगा नगर निगम
नगर निगम


लखनऊ। नगर आयुक्त का एक वर्ष का वेतन काटने का उपभोक्ता फोरम के आदेश का मामला तूल पकड़ने लगा है। आदेश के खिलाफ नगर निगम ने हाईकोर्ट में जाने की तैयारी की है। अगले सप्ताह याचिका दायर की जाएगी। अपील के लिए दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं।
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि राजधानी के लोग नगर निगम के उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आते। उपभोक्ता फोरम ने अपने अधिकार क्षेत्र का हनन किया है। फोरम का गठन ग्रहकों को न्याय दिलाने के लिए है। व्यक्ति विशेष के मामले की सुनवाई का अधिकार है। नगर निगम अधिनियम के तहत लोकल बाडी को सम्पत्ति पर टैक्स लेने का अधिकार है। यह सम्पत्ति खाली प्लाट, भवन, गाड़ी आदि से लिया जा सकता है। मौजूदा समय में सिर्फ हाउस टैक्स ही लिया जा रहा है। यह टैक्स इनकम टैक्स या सेल टैक्स की तरह है। अधिकारी ने कहा कि नगर निगम लोगों को कोई उत्पाद मुहैया नहीं कराता। हाउस टैक्स के बदले नगर निगम अपने कर्तव्य के तहत सुविधाएं मुहैया करा रहा है। सिर्फ हाउस टैक्स की धनराशि से ही पूरे शहर को सेवा उपलब्ध कराना संभव नहीं है। सरकार 14वां वित्त, अवस्थापना, राज्य वित्त आदि मदों में धनराशि मुहैया कराती है। यह धनराशि सिर्फ एक जगह पर खर्च नहीं की जा सकती। पूरे शहर को ध्यान में रखकर सेवाएं मुहैया कराई जा रही है। यदि हाउस टैक्स का हवाला दिया जाएगा तो जितना संबंधित व्यक्ति ने हाउस टैक्स दिया है उससे ज्यादा उसे सेवाएं मुहैया कराई जा चुकी है। इस मामले में हाईकोर्ट में अपील दाखिल की जाएगी। दूसरी ओर उपभोक्ता फोरम के न्यायिक अधिकारी राजषि शुक्ल का कहना है यदि कोई हाउस टैक्स दे रहा है तो उसे सुविधाएं लेने का अधिकार है। वह सेवाओं के लिए अपनी जेब से पैसे दे रहा है। इस मामले में उन्होंने अपने स्वविवेक से फैसला दिया है। नगर निगम यदि हाईकोर्ट जाता है तो यह सराहनीय कदम होगा। वह इसके लिए नगर निगम का स्वागत करते हैं। हाईकोर्ट का जो भी दिशा निर्देश होगा उसका पालन किया जाएगा।


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