राजधानी में कागजों पर संचालित 283 और स्कूल बंद किये गए
बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अमरकांत सिंह ने बताया कि इन स्कूलों के खिलाफ शिकायतें मिली थी।


लखनऊ :  राजधानी में बेसिक शिक्षा महकमे ने नियमों को दरकिनार करके चोरी छिपे संचालित किये जा रहे 283 स्कूलों को तत्काल बंद करने का आदेश जारी किया है। इन सभी स्कूलों की मान्यता निरस्त करते हुए चेतावनी दी गई है कि यदि ये दोबारा चलते हुए पाये गये तो इनके खिलाफ शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत कड़ी कार्रवाई की जायेगी।

बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अमरकांत सिंह ने बताया कि इन स्कूलों के खिलाफ शिकायतें मिली थी। पूर्व में इन सभी स्कूलों को ब्यौरा अपलोड करने के निर्देश दिये गये थे, लेकिन इन्होंने नियमों का पालन नहीं किया गया और कोई जवाब नहीं दिया। वहीं खण्ड शिक्षा अधिकारियों की जांच में इन स्कूलों का धरातल पर कहीं अता-पता नहीं था। इसलिए ये सख्त कदम उठाया गया है। 

उन्होंने बताया कि ये स्कूल प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर हैं। इन सभी 283 स्कूलों ने यू डायस पोर्टल पर भी अपना ब्योरा अपलोड नहीं किया था। सत्यापन नहीं होने के कारण पूर्व में दी गई इनकी मान्यता को निरस्त कर दिया गया है। इन स्कूलों को अमान्य मानते हुए आरटीई की धाराओं के तहत एक लाख रुपये का आर्थिक दंड और दोबारा संचालित किए जाने पर 10 हजार रुपये प्रतिदिन का जुर्माना वसूला जाएगा।

जिन स्कूलों की मान्यता रद्द की गई है उनमें प्रमुख रूप से इजी वे कॉन्वेंट स्कूल, हेरिटेज एकेडमी, लाल बहादुर मेमोरियल पब्लिक स्कूल, गोमती गर्ल्स, बाल वाटिका पब्लिक स्कूल, जवाहर विद्या बालागंज, दून पब्लिक स्कूल जूनियर हाईस्कूल,सुभाष विद्यालय अलीगंज, न्यू सरस्वती बाल विद्या मंदिर, ट्रिनिटी पब्लिक स्कूल, ब्राइट स्टार कॉलेज, महानगर पब्लिक स्कूल, अरुणोदय पब्लिक स्कूल, महर्षि वाल्मीकि स्कूल, बाल भारती पब्लिक स्कूल सरोजनीनगर, लखनऊ ज्ञान पब्लिक स्कूल आदि हैं।

बेसिक शिक्षा विभाग ने पिछले हफ्ते भी 85 स्कूलों को बंद करने के निर्देश दिये थे। इस तरह कुल दो सप्ताह में अभी तक 368 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के स्कूलों की मान्यता निरस्त की जा चुकी है। नियमों की अनदेखी करने पर आगे भी इस तरह की कार्रवाई की जा सकती है। 

प्रदेश की बेसिक शिक्षा तथा बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)अनुपमा जायसवाल ने कहा है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना विभाग का प्रमुख लक्ष्य है। इसमें स्कूल स्तर पर किसी भी प्रकार की लापरवाही मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने कहा कि सरकार हर बच्चे को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराने के लिए काम कर रही है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराये जाने हेतु शैक्षिक सत्र 2019-20 को विभाग ‘शैक्षिक उन्नयन वर्ष’ के रूप में मना रहा है। स्कूल जाने योग्य आयु के सभी बच्चों का नामांकन कराना हमारा लक्ष्य है।

उन्होंने कहा कि इसके साथ ही यदि शिक्षक स्कूल टाइम पर सोशल मीडिया पर एक्टिव पाये जाएंगे तो उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अध्यापक स्कूल में बेहद जरूरी होने पर ही मोबाइल फोन का इस्तेमाल करें।

अधिक राज्य की खबरें