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अवैध बजरी खनन मामला: फरार हेड कांस्टेबल तेजाराम ने किया सरेंडर
बजरी माफियाओं से बंधी लेकर अवैध रूप से बजरी का खनन और परिवहन


जोधपुर: बजरी माफियाओं से बंधी लेकर अवैध रूप से बजरी का खनन और परिवहन करने के मामले में एसीबी की कार्रवाई के दौरान फरार हुए बासनी थाने के हैडकांस्टेबल तेजाराम को एसीबी तो नहीं पकड़ पायी लेकिन मंगलवार को हाईकोर्ट में जमानत की अर्जी खारिज होने के बाद वह स्वयं बुधवार सुबह एसीबी कोर्ट में आकर सरेंडर हो गया।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी गत माह एसीबी ने बासनी थाने में बजरी से भरे एक डम्पर छोडऩे और नियमित रूप से बजरी के डम्पर हल्का क्षेत्र से गुजरने की एवज में रिश्वत लेने की शिकायत पर थाने पर दबिश दी थी। पुलिस ने उस वक्त थाने में तैनात और बजरी से भरा डम्पर जब्त करने वाले थानेदार गजेन्द्रसिंह  को तो गिरफ्तार कर लिया। लेकिन इस कार्रवाई के बाद तत्कालीन थानाधिकारी संजय बोथरा और थाने का हैडकांस्टेबल तेजाराम मौके से फरार हो गये थे।

इस मामले में जहां मौके से फरार थानाधिकारी ने हाईकोर्ट में सीआरपीसी की धारा 482 के ततहत एफआईआर निरस्त करने की याचिका दायर कर रखी लेकिन अब तक उसको कोई राहत नहीं मिली जबकि हैडकांस्टेबल तेजाराम की अग्रिम जमानत याचिका एसीबी कोर्ट ने खारजि कर दी थी। जिस पर तेजाराम की ओर से जरिये अधिवक्ता हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की दरखास्त की थी जिसकी कल हाईकोर्ट के न्यायाधीश विजय विश्नोई ने इस प्रकरण की जांच कर रहे एसीबी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से 12 जुलाई को के स डायरी के साथ हाजिर होने और अब तक नहीं पकड़े पाने के कारणों के जवाब सहित पेश होने को कहा गया। न्यायाधीश ने मौखिक तौर पर इस मामले में हैड कांस्टेबल के पकडऩे में असफल रही एसीबी को भी शीघ्र उसे गिरफ्तार करने के निर्देश दिये थे।

एसीबी कोर्ट से जमानत निरस्त होने और हाईकोर्ट से भी जमानत नहीं मिलने की संभावना के बाद बुधवार को अचानक रिश्वत प्रकरण के वांछित बासनी थाने के तत्कालीन हैड मुंशी तेजाराम एसीबी कोर्ट में पेश हुआ और खुद को सरेण्डर कर दिया। अदालत ने उसको सरेण्डर होने के बाद चालानी गार्ड के साथ कोर्ट स्थित बैरक में भेजकर एसीबी के अधिकारियों को सूचना दी।

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