नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर मायावती ने राज्यपाल को लिखा खत
फाइल फोटो


बसपा सुप्रीमो मायावती ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर एक खत लिखा है। साथ ही इसे संविधान विरोधी कानून बताया है। 


मायावती ने लिखा है कि 

जैसा कि यह विदित है कि नये नागरिकता संशोधन कानून (सी.ए.ए.) का पूरे देशभर में हर जगह सड़कों पर काफी तीव्र जनविरोध हुआ है और इस मामले में हमारी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) भी, पूरी तरह से देश की जनभावना के साथ खड़ी है। वैसे भी धर्म के आधार पर नागरिकता देने वाले इस नये कानून को पहली नजर में ही घोर विभाजनकारी व असंवैधानिक मानकर हमने इसका शुरू से ही विरोध किया है तथा संसद के दोनों सदनों में इस विधेयक के विरूद्ध भी अपना वोट दिया है और फिर पार्टी के संसदीय प्रतिनिधिमण्डल ने राष्ट्रपति भवन जाकर माननीय राष्ट्रपतिजी को ज्ञापन दिया व इस संविधान-विरोधी कानून को वापस लिए जाने की भी माँग की है। 


हालाँकि इस नये कानून के खिलाफ पूरे देशभर में जो काफी बड़े पैमाने पर जनविरोध हुआ है और यह विरोध अभी भी काफी हद तक जारी है वे ज्यादातर शान्तिपूर्ण रहे हैं, लेकिन खासकर उत्तर प्रदेश में इस दौरान हुई व्यापक हिंसा, आगज़नी व फायरिंग आदि की घटनाओं में जान-माल की काफी क्षति हुई। पहले पुलिस और राज्य सरकार ने इसके लिए पूरे

तौर पर आन्दोलनकारियों को दोषी ठहराया और इसकी आड़ में "बदले" की सरकारी कार्रवाई भी बड़े पैमाने पर शुरू की, जिसके तहत् बड़ी संख्या में लोगों को जेल की सलाखों के पीछे भी भेज दिया गया। लेकिन अब मीडिया जगत में जमीनी रिपोर्टो के हवाले से जो ख़बरें लगातार आ रही हैं वे यह साबित कर रही हैं कि इस दौरान यू.पी. पुलिस/प्रशासन व सरकार का रवैया व व्यवहार काफी बर्बर, विद्वेषपूर्ण व पक्षपातपूर्ण रहा है।


इसी ही कारण बी.एस.पी. ने यू.पी. की तमाम हिंसक घटनाओं व पुलिस कार्रवाई आदि की उच्च-स्तरीय न्यायिक जाँच कराने की माँग की थी और आज मैं फिर अपनी उस माँग को आपके समक्ष दोहराती हूँ, ताकि हिंसा के लिए दोषियों को सज़ा मिलने के साथ-साथ यू.पी. सरकार के इस रवैये तथा पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की जुल्म-ज्यादतियों का भी पर्दाफाश जनता के सामने हो सके जिन्होंने ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय, अनुचित व बर्बता की है। साथ ही, बी.एस.पी. की आपसे यह भी माँग है कि जो भी निर्दोष लोग पुलिस बर्बरता का शिकार हुये हैं अर्थात् मारे गये हैं तो उनके परिवार को समुचित सरकारी सहायता दी जाये तथा निर्दोष लोगों को यथाशीघ्र जेल से रिहा करके उन पर लगाये गये गलत मुकदमों आदि को भी तुरन्त वापस लिया जाये। यू.पी. की सरकार को इतना तो निष्पक्ष, संवेदनशील व न्यायपूर्ण होना ही चाहिये, यह बी.एस.पी. की माँग है। 

(देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं)

अधिक राज्य की खबरें