अखिलेश ने साधा पीएम मोदी पर निशाना, कहा-सोचो अंदर की रोशनी बुझाकर...कौन पा सका बाहर के उजाले
अखिलेश ने कहा-लोगों के लिए टेस्टिंग किट्स पर्याप्त नहीं हैं. 


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिये जलाने वाली अपील पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तंज कसा है. उन्होंने रविवार सुबह एक ट्वीट किया, जिसमे में लिखा, 'सोचो अंदर की रोशनी बुझाकर, कौन पा सका है बाहर के उजाले.' प्रधानमंत्री मोदी ने देश के लोगों से अपील की है कि रविवार रात 9 बजे 9 मिनट के लिए अपने-अपने घरों की बत्ती बुझाएं और दुनिया में कोरोना महामारी के खिलाफ एकजुटता का संदेश देने के लिए दीया, मोमबत्ती या मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाएं.


पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्वीट में लिखा है, 'लोगों के लिए टेस्टिंग किट्स पर्याप्त नहीं हैं. हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) भी पर्याप्त नहीं हैं. गरीबों को खिलाने के लिए पर्याप्त भोजन भी नहीं हैं. यही आज हमारे सामने मुख्य चुनौतियां हैं.' अखिलेश यादव ने आगे लिखा- सोचो अंदर की रोशनी बुझाकर, कौन पा सका है बाहर के उजाले.


इससे पहले कोरोना संकट के चलते देश में 21 दिनों का लॉकडाउन किया गया है. इस दौरान शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को वीडियो संदेश भी दिया था. प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि कोरोना के अंधकार को प्रकाश की ताकत से हराने की जरूरत है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 5 अप्रैल रविवार को रात नौ बजे नौ मिनट के लिए लोग अपने घरों की लाइटें बंद करें और दरवाजे-खिड़की पर खड़े होकर दीया, मोमबत्ती जलाएं या फिर मोबाइल की फ्लैश लाइट-टॉर्च से रोशनी करें. इस शक्ति के जरिए हम ये संदेश देना चाहते हैं कि देशवासी एकजुट हैं. 



दूसरी ओर अखिलेश यादव ने अपने ट्वीट में पीपीई और टेस्टिंग किट का जिक्र किया है. इस बात का खुलासा एक सर्वेक्षण में भी सामने आया है. आंध्र प्रदेश में विदेश से लौटे लोगों की पहचान करना एक बड़ी चुनौती बन गई है, वहीं जम्मू-कश्मीर, बिहार, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के कई जिले व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) और चिकित्सा सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं. ये खुलासे प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग की ओर से 'कोविड-19 राष्ट्रीय तैयारी सर्वेक्षण 2020' में हुए हैं. सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के खतरे के बारे में लोगों को जागरूकता काफी अधिक है.


सर्वेक्षण में कहा गया है, "उत्तरदाताओं में से कुल 92 प्रतिशत लोगों को इस खतरे के बारे में पता है और 75 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे कोविड-19 के खतरे से निपटने के लिए सावधानी बरत रहे हैं." इसमें कुछ जिलों में जागरूकता पैदा करने की जरूरत के बारे में कहा गया है. सर्वेक्षण में कहा गया है, "69 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने यह माना है कि लोग कोविड-19 लॉकडाउन में शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से रह रहे हैं, जबकि 31 प्रतिशत लोगों ने कहा कि लोग भयभीत हैं."

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