मुख्यमंत्री ने ‘राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर-संसद में दो टूक’ पुस्तक का किया विमोचन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर सही मायने में समाजवादी विचारधारा को मानने वाले नेता थे।


लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर सही मायने में समाजवादी विचारधारा को मानने वाले नेता थे। उनके द्वारा संसद एवं संसद के बाहर व्यक्त किए गए विचार और उनका व्यक्तित्व आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने हमेशा देश एवं समाज की एकजुटता के लिए प्रयास किया। उन्होंने कोई भी कार्य वोट बैंक की राजनीति से प्रभावित होकर नहीं किया। मुख्यमंत्री सोमवार को यहां विधान सभा भवन के राजर्षि पुरुषोत्तम दास टण्डन सभागार में ‘राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर-संसद में दो टूक’ पुस्तक के विमोचन अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्हें स्व. चन्द्रशेखर के साथ संसद में कार्य करने का अवसर मिला है। संसद में बहस के दौरान विभिन्न विषयों पर उनके द्वारा व्यक्त किए गए विचार दलगत राजनीति से हटकर मौलिक एवं भारतीय परिप्रेक्ष्य में प्रयुक्त होने वाले थे।
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि कश्मीर समस्या के सम्बन्ध में चन्द्रशेखर ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि ‘कश्मीर जाएगा तो एक भूखण्ड नहीं जाएगा। हमारी धर्मनिरप्रेक्षता चली जाएगी, हमारी एकता चली जाएगी, हमारी वे मान्यताएं चली जाएंगी, जिन मान्यताओं के आधार पर भारत ने आजादी की लड़ाई लड़ी थी। जिन मान्यताओं के आधार पर महात्मा गांधी ने कहा था कि हम गरीब हो सकते है, लेकिन दुनिया को हम आध्यात्मिक नेतृत्व देने की शक्ति रखते हैं।’ इसी प्रकार पंजाब, श्रीलंका आदि समस्याओं के सम्बन्ध में भी उन्होंने मौलिक एवं परम्परा से हटकर विचार व्यक्त किए।

सीएम योगी ने कहा कि पद एवं प्रतिष्ठा को लेकर चन्द्रशेखर में कोई अहम नहीं था। वह हमेशा भारतीय परम्परा और राष्ट्र की मर्यादा के प्रबल समर्थक रहे। कोई व्यक्ति हमेशा स्थायी नहीं रहता, लेकिन उसके विचार शाश्वत होते हैं। चन्द्रशेखर वैचारिक क्रांति के शाश्वत प्रतीक थे। चन्द्रशेखर वास्तव में लोकनायक जयप्रकाश नारायण, डॉ. लोहिया एवं आचार्य नरेन्द्र देव की समाजवादी विचारधारा के संवाहक थे। उन्होंने कहा कि विचारधारा का अंतिम उद्देश्य लोक कल्याण एवं राष्ट्र कल्याण ही होना चाहिए। चाहे वह समाजवादी विचारधारा हो या राष्ट्रवादी विचारधारा। 

सत्य कभी-कभी काफी कड़वा होता है। चन्द्रशेखर हमेशा बिना लाग-लपेट के संसद में बेबाकी से अपनी बात कहते थे। निश्चित रूप से कुछ लोगों को उनके विचार कठोर लगते रहे होंगे, लेकिन वह देशहित में ही बोलते थे। वह हमेशा संविधान के दायरे में रहकर लोकतांत्रिक ढंग से राजनीति करने के हिमायती रहे। इसीलिए वर्ष 1975 में जब देश में आपातकाल रोपित किया गया तो उस समय उन्होंने कांग्रेस पार्टी को छोड़ दिया। 



‘राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर संसद में दो टूक’ पुस्तक को बेहद उपयोगी बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पुस्तक में चन्द्रशेखर जी के भाषणों को जगह दी गई है, जिनमें वे देश की तमाम समस्याओं एवं पड़ोसी देशों से भारत के सम्बन्ध आदि विषयों पर बेबाकी से अपने राय रखते हैं। वे अकेले थे, लेकिन अनेक विचारधाराओं का प्रतिनिधित्व करते थे।मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी द्वारा चलाए गए स्वदेशी अभियान को चन्द्रशेखर ने पूरा समर्थन किया। कई लोगों को यह भ्रम होता है कि चन्द्रशेखर नास्तिक थे, लेकिन उन्होंने स्वयं महंत अवैद्यनाथ से कहा था कि वह नास्तिक नहीं हैं। वह अपने आश्रम में भारत की सनातन परम्परा एवं धार्मिक मूल्यों का पूरा ध्यान रखते थे। 

तीन तलाक को लेकर महिलाओं के साथ हो रहे अन्याय की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग इस प्रकरण पर मौन हैं, उन्हें समाज कभी माफ नहीं करेगा। उन्होंने कॉमन सिविल कोड को जरूरी बताते हुए कहा कि समाज और देश के हित में यह जरूरी है कि सभी के लिए कानून बराबर हो। चन्द्रशेखर भी इस बात के हिमायती रहे हैं। अगर सभी संस्थाएं देशहित में काम करें तो टकराव की गुंजाइश नहीं रहेगी। 

मुख्यमंत्री ने मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका को भी हवाला देते हुए कहा कि अक्सर नकारात्मक पक्षों को ध्यान न देते हुए अगर सोच सकारात्मक हो तो समाज में रचनात्मक कार्यों को बढ़ावा दिया जा सकता है और यह काम मीडिया बाखूबी कर सकता है। उन्होंने पुस्तक के सम्पादक धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि एक ऐसे समाजवादी नेता के विचार को लेखक ने वर्तमान पीढ़ी के समक्ष रखने का प्रयास किया, जिनके विचार उपयोगी, मार्गदर्शक एवं राष्ट्रीय एकता के लिए हमेशा प्रासंगिक रहेंगे। 
इससे पहले, विधान सभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित ने स्व. चन्द्रशेखर की सहजता एवं लोकतांत्रिक मूल्यों में उनकी आस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि वह जमीन से जुड़े नेता थे और संविधान तथा लोकतंत्र के विरुद्ध कोई भी बात स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं होते थे। कार्यक्रम में विधायक रघुराज प्रताप सिंह (राजा भईया) एवं पुस्तक के विचार सम्पादक एवं विधान परिषद सदस्य यशवंत सिंह ने भी अपने विचार रखे। 

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