US कोर्ट ने ट्रंप के 'मुस्लिम बैन' के खिलाफ सुनाया फैसला
ट्रंप प्रशासन की ओर से कोर्ट में कहा गया था कि 6 मार्च को उसके द्वारा जारी किया गया आदेश वैध है।


वॉशिंगटन : राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा चुनिंदा मुस्लिम-बहुल देशों के नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के फैसले को एक बार फिर अदालत ने खारिज कर दिया है। 9वें सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने ट्रंप प्रशासन के संशोधित फैसले के खिलाफ निर्णय सुनाया है। अदालत ने कहा कि सरकार का यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा से नहीं, बल्कि मुस्लिमों को अलग-थलग करने की मंशा से प्रेरित है। कोर्ट ने कहा कि 6 मार्च को राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा जारी किया गया यह फैसला मौजूदा इमिग्रेशन कानूनों के खिलाफ है। मालूम हो कि इससे पहले चौथे सर्किट कोर्ट ने 25 मई को भी इस बैन के खिलाफ आदेश सुनाया था। 

हवाई प्रांत के अटॉर्नी जनरल द्वारा दायर किए गए एक मुकदमे पर फैसला सुनाते हुए फेडरल कोर्ट ने सरकार की ओर से पेश किए गए दावे को खारिज कर दिया। ट्रंप प्रशासन की ओर से कोर्ट में कहा गया था कि 6 मार्च को उसके द्वारा जारी किया गया आदेश वैध है। सरकार ने कोर्ट में अपने आदेश के खिलाफ दिए गए तर्कों को फर्जी बताया था। सरकार की ओर से दी गई दलीलों को खारिज करते हुए 9वें सर्किट ने कहा कि चुनिंदा देशों के नागरिकों को अमेरिका में प्रवेश न देना असल में मुस्लिमों को अलग-थलग करने की मंशा से लिया गया निर्णय है। कोर्ट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन अपने इस फैसले के समर्थन में जो तर्क पेश कर रहा है, वे सभी केवल एक असंवैधानिक मकसद को छुपाने का जरिया है। 

अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि राष्ट्रपति चाहें, तो अपने किसी भी असंवैधानिक इरादे को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय हित का मुद्दा उछाल सकते हैं। जजों ने अपने फैसले में लिखा, 'एक श्वेत राष्ट्रवादी अमेरिका को केवल श्वेत लोगों का देश बनाने की मांग कर सकता है और अफ्रीका से आने वाले लोगों के यहां प्रवेश पर प्रतिबंध लगा सकता है। बंदूक का विरोध करने वाला कार्यकर्ता लोगों को बंदूक रखने के लिए लाइसेंस दिए जाने पर रोक लगाने की मांग कर सकता है, साथ ही जो देश बंदूक बनाने में इस्तेमाल होने वाली चीजें बनाते हैं उन देशों से आयात करने पर भी रोक लगा सकता है। अगर सरकार अपने इन फैसलों के पीछे कोई वैध दिखने वाला कारण गिनाती है, तब कोर्ट उसमें दखलंदाजी नहीं कर सकेगा। लेकिन यह कानून नहीं है।' 

कोर्ट ने आगे कहा कि ट्रंप प्रशासन इस प्रतिबंध को अक्टूबर तक टालने के लिए तैयार हो गया था। कोर्ट ने इसका जिक्र करते हुए माना कि यह पूरा मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ नहीं, बल्कि मुस्लिमों पर प्रतिबंध लगाने से जुड़ा है। कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के उस तर्क को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि यह बैन मुस्लिमों के साथ भेदभाव नहीं करता है, बल्कि कुछ चुनिंदा देशों के नागरिक ही इस प्रतिबंध की जद में आते हैं। जजों ने अपनी टिप्पणी में कहा, 'बहिष्कार के अपने फैसले में कुछ लोगों को घटाकर या बढ़ाकर राष्ट्रपति धार्मिक आधार पर भेदभाव करने के आरोपों से बच नहीं सकते हैं।' ट्रंप प्रशासन ने अभी अदालत के इस फैसले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। वाइट हाउस के प्रवक्ता सीन स्पाइसर ने कहा कि सरकार फिलहाल अपने विकल्पों पर विचार कर रही है। स्पाइसर ने 'मुस्लिम बैन' का बचाव करते हुए इसे पूरी तरह से कानूनी बताया। 

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