UNO महासभा में नवाज़ शरीफ पीएम मोदी के गैर मौजूदगी में कर रहे हैं चालाकी
संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान कश्मीर के मुद्दे को पूरे जोरशोर के साथ उठाने की तैयारी कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बार संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में शिरकत नहीं करने की संभावनाओं के मद्देनजर माना जा रहा है कि नवाज शरीफ यूएन में इस मौके का पूरा फायदा उठाने की कोशिश करेंगे


संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान कश्मीर के मुद्दे को पूरे जोरशोर के साथ उठाने की तैयारी कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बार संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में शिरकत नहीं करने की संभावनाओं के मद्देनजर माना जा रहा है कि नवाज शरीफ यूएन में इस मौके का पूरा फायदा उठाने की कोशिश करेंगे। इस बार यूएन महसभा में भारत का नेतृत्व सुषमा स्वराज कर सकती हैं।

शुक्रवार को 22 पाकिस्तानी सांसदों को विशेष दूत के तौर पर कश्मीर मुद्दे को उठाने के लिए अलग-अलग देशों में भेजने के निर्णय को भारत को उकसाने वाली कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। इसी हफ्ते पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने सुरक्षा परिषद के पांच स्थाई सदस्य देशों के सामने दूसरी बार भारत और कश्मीर पर पाक के पक्ष से अवगत कराया। इन पांचों देशों के राजदूतों और यूरोपीय संघ को पाकिस्तान ने यूएनएससी प्रस्तावों के तहत उनके अंतरराष्ट्रीय दायित्वों की याद दिलाई। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नफीस जकारिया ने बताया, विदेश मामलों पर नवाज शरीफ के सलाहकार सरताज अजीज ने दुनिया के नेताओं को कश्मीर में भारतीय फौज द्वारा मानवाधिकार हनन के बारे में बताया और निर्दोष लोगों के खिलाफ ताकत के खतरनाक इस्तेमाल की भर्त्सना की। उधर, नवाज शरीफ ने यूएन में पाकिस्तान के कश्मीर अजेंडे पर कहा, हम संयुक्त राष्ट्र को कश्मीरी अवाम को आत्मनिर्णय के उसके काफी समय से लंबित वादे की याद दिलाते रहेंगे। पाकिस्तान के कूटनीतिक हमले को तेज करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कश्मीर मुद्दा उठाने के लिए सांसदों को भेजने का फैसला किया है। हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के सुरक्षा बलों द्वारा मारे जाने के बाद 8 जुलाई को कश्मीर घाटी में भड़की अशांति के जारी रहने के बीच भारत और पाकिस्तान के बीच जुबानी जंग बढ़ने के मद्देनजर शरीफ ने यह कदम उठाया है। नवाज शरीफ कहा, हम भारत को यह भी स्पष्ट कर देंगे कि यह भारत ही है जिसने कश्मीर मुद्दे पर कई दशक पहले संयुक्त राष्ट्र का रुख किया था लेकिन अब यह अपने वादे को पूरा नहीं कर रहा।


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