नई दिल्ली : भारतीय रिजर्व बैंक ने 19 मई 2023 को 2000 रुपये के करंसी नोटों को प्रचलन से वापस ले लिया था. लेकिन, RBI के ताजा आंकड़ों के आधार में सामने आया 30 जून 2025 तक 6,099 करोड़ रुपये के 2 हजार के नोट अभी भी बाजार में मौजूद है. बहुत से लोगों के मन में यह सवाल है कि उनके पास मौजूद दो हजार रुपये का नोट क्या अब अवैध हो गया है? उनके पास मौजूद नोट की वजह से क्या उन पर कोई कानूनी कार्रवाई हो सकती है?
इन सवालों और दो हजार रुपये के नोट पर फैले भ्रम को अब आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने दूर कर दिया है. मल्होत्रा ने गुरुवार को संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति को बताया ₹2000 के नोट अब चलन में नहीं हैं, यानी इन्हें बैंकों से जारी नहीं किया जा रहा, लेकिन ये अभी भी वैध मुद्रा हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रिजर्व बैंक ने इन नोटों को अवैध घोषित नहीं किया है.
इसका मतलब है कि 2000 रुपये का नोट अभी भी अपने पास रख सकते हैं और ऐसा करने पर आपके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी. वैध मुद्रा होने का मतलब है कि अगर आपके पास ये नोट हैं तो आप इन्हें बैंकों में जमा कर सकते हैं या RBI के क्षेत्रीय कार्यालयों में बदल सकते हैं. आप डाकघर के माध्यम से भी 2 हजार के नोट को RBI के किसी भी इश्यू ऑफिस में भेज सकते है.
मजबूत है भारतीय अर्थव्यवस्था
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति के सामने भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणाली की स्थिति पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने सदस्यों को भरोसा दिलाया कि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है और अच्छा प्रदर्शन कर रही है. बैठक की अध्यक्षता कर रहे समिति प्रमुख भरतृहरि महताब ने इस चर्चा को “बहुत सार्थक” बताया और कहा कि इसमें कई अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई. चर्चा का मुख्य केंद्र ₹2000 के नोट रहे, जिनकी स्थिति को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई थी.
नकली नोटों का भी उठा मुद्दा
बैठक के दौरान नकली मुद्रा का मुद्दा भी सामने आया. एक सांसद ने जानकारी दी कि हाल ही में बड़ी संख्या में नकली ₹500 के नोट जब्त किए गए हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यह संख्या कुल चलन में मौजूद नोटों की तुलना में बहुत कम है. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि RBI और सरकार दोनों इस चुनौती को गंभीरता से ले रहे हैं और नकली नोटों की रोकथाम के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं.
सांसदों ने भारत में क्रिप्टोकरेंसी के नियमन और इसकी वर्तमान स्थिति को लेकर भी सवाल किए. गवर्नर ने समिति को इस विषय पर भी विस्तार से जानकारी दी और बताया कि इस पर सरकार और संबंधित संस्थाएं लगातार काम कर रही हैं. संजय मल्होत्रा जुलाई के अंत को फिर से समिति के सामने पेश होंगे और इस बार विशेष रूप से दिवालियापन एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) पर चर्चा की जाएगी.