भारत के लिए खुशखबरी: कच्चा तेल 90 डॉलर से नीचे, पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद बढ़ी
तेल बाजार में गिरावट की बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव घटने की उम्मीद है।


नई दिल्ली : मिडिल ईस्ट में तनाव की वजह से आसमान छू रहे कच्चे तेल के दाम अब नरम पड़ने लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट और WTI क्रूड दोनों 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसल गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीद से बाजार को राहत मिली है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह खबर महंगाई और आयात बिल कम करने के लिहाज से अहम है।

90 डॉलर के नीचे आया क्रूड: दो महीने का सबसे निचला स्तर
लगातार तेजी के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड करीब 89 डॉलर प्रति बैरल और WTI 86 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। यह लेवल पिछले दो महीनों में सबसे निचला है। कुछ दिन पहले जियो-पॉलिटिकल टेंशन के कारण दाम तेजी से बढ़ रहे थे।

अमेरिका-ईरान में नरमी के संकेत से बदला बाजार का रुख
तेल बाजार में गिरावट की बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव घटने की उम्मीद है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समझौते के संकेत के बाद निवेशकों की चिंता कम हुई। संघर्ष बढ़ने पर सप्लाई बाधित होने का डर था, जो अब घट गया है। हालांकि अभी किसी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं हुई है।

भारत को मिल सकती है राहत: महंगाई और आयात बिल पर असर
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में दाम गिरने से आयात बिल कम होगा और महंगाई पर दबाव घटेगा। पेट्रोल-डीजल के रेट में कटौती की गुंजाइश भी बनेगी। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। किसी भी नई घटना से बाजार में फिर उतार-चढ़ाव आ सकता है।

(देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते है)

अधिक बिज़नेस की खबरें