EV बूम के बीच खतरे की घंटी: 80,000 घरों की स्टडी में खुलासा, 45% घरों में चार्जिंग असुरक्षित
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नई दिल्ली : देश में इलेक्ट्रिक वाहनों का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन घरों का इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर अभी तैयार नहीं है। एक नई रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि भारत के लगभग 45% घर सुरक्षित रूप से EV चार्ज करने के लायक ही नहीं हैं। इन घरों को अपग्रेड की सख्त जरूरत है, वरना असुरक्षित चार्जिंग से आग लगने, इलेक्ट्रिकल फॉल्ट और महंगे उपकरण खराब होने का भारी खतरा है। रिपोर्ट के मुताबिक, लोग मजबूरी में सामान्य पावर सॉकेट और एक्सटेंशन केबल जैसे जुगाड़ू तरीकों पर निर्भर हैं।

80,000 घरों के डेटा से खुलासा: सिर्फ 55% के पास सेफ चार्जिंग
'द नेट-ज़ीरो ट्रांज़िशन स्टार्ट्स एट होम: इनेबलिंग EV-रेडी रेजिडेंसेस इन इंडिया' रिपोर्ट टियर-1, टियर-2 और टियर-3 शहरों के 80,000+ घरेलू EV चार्जर्स के डेटा पर आधारित है। इसमें स्वतंत्र घरों, अपार्टमेंट, झुग्गी-बस्तियों और किराए के मकानों को शामिल किया गया।

रिपोर्ट बताती है कि वर्तमान में केवल 55% संभावित EV खरीदारों के पास ही घरेलू चार्जिंग की सुविधा है। जबकि आवासीय चार्जिंग ही EV चार्ज करने का सबसे प्राथमिक माध्यम है। अनुमान है कि EV से जुड़ी बिजली की खपत 2024 में कुल राष्ट्रीय मांग के 0.2% से बढ़कर 2035 तक 6% हो जाएगी।

असुरक्षित चार्जिंग के बड़े खतरे: आग, ट्रांसफार्मर फेल, बैटरी खराब
रिपोर्ट में कड़ी चेतावनी दी गई है कि बुनियादी ढांचे की कमी के कारण लोग अस्थायी एक्सटेंशन केबल और साझा बिजली कनेक्शन जैसे असुरक्षित तरीकों पर निर्भर हैं। इससे आग लगने का भारी खतरा रहता है।

जब सामान्य सर्किट्स पर ज्यादा लोड पड़ता है तो वोल्टेज में भारी उतार-चढ़ाव, तारों का जरूरत से ज्यादा गर्म होना, ट्रांसफार्मर खराब होना और इलाके में बिजली गुल होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। असुरक्षित चार्जिंग से वाहन की बैटरी भी समय से पहले खराब हो सकती है और चार्जिंग में निरंतरता नहीं रहती।

सरकारों का EV पर जोर, लेकिन घरों में तैयारी अधूरी
ये रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब सरकारें EV को लेकर सख्त हैं। दिल्ली सरकार ने जनवरी 2027 से नए पेट्रोल-CNG तिपहिया और अप्रैल 2028 से पेट्रोल दोपहिया वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगाने का फैसला किया है।

पिछले एक दशक में भारत में EV का चलन तेजी से बढ़ा है, लेकिन घरों में चार्जिंग की सुविधा अभी भी बेहद असमान है। सुरक्षित और भरोसेमंद चार्जिंग के लिए हर घर को न्यूनतम मानक पूरा करना जरूरी है, जो 45% घरों में नहीं है।


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