नहीं चलेगी US की दादागिरी...ट्रंप के टैरिफ पर शी जिनपिंग तोड़ी चुप्पी,  साथ आए ड्रैगन-यूरोप
शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप


बीजिंग/वाशिंगटन : चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका के टैरिफ पर चुप्पी तोड़ी है. अमेरिका के सबसे करीबी दोस्त यूरोप को वह अपने साथ लाने में लगे हैं. राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका के खिलाफ यूरोप को साथ आने का न्योता दिया है. यह जिनपिंग का मास्टर स्ट्रोक कहा जा सकता है. उन्होंने टैरिफ को एकतरफा दादागिरि बताया. शुक्रवार को जिनपिंग ने स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज से बीजिंग में मुलाकात की. इस दौरान जिनपिंग ने कहा, ‘चीन और यूरोप को अपनी अंतर्राष्ट्रीय जिम्मेदारियां पूरी करनी चाहिए. दोनों को मिलकर एकतरफा दादागिरी का विरोध करना चाहिए.’ जिनपिंग का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी सामान पर 145 परसेंट टैरिफ लगाकर ट्रेड वार को और भी ज्यादा भड़का दिया है. जी हां, वाइट हाउस के लेटेस्ट मेमो के मुताबिक चीन पर टैरिफ 125 नहीं बल्कि सीधे 145 प्रतिशत बताया गया है.

जिनपिंग ने जोर देकर कहा, ‘हमें न सिर्फ अपने हक की रक्षा करनी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय निष्पक्षता और न्याय को भी बचाना है’ उनका कहना साफ था कि अमेरिका की मनमानी के खिलाफ एकजुट होना पड़ेगा. दूसरी ओर स्पेनी पीएम पेड्रो सांचेज ने ट्रेड में आ रही समस्याओं के बीच चीन के साथ सहयोग बढ़ाने की वकालत की. उन्होंने कहा, ‘स्पेन और यूरोप का चीन के साथ बड़ा व्यापारिक घाटा है, जिसे हमें ठीक करना होगा. लेकिन ट्रेड में तनाव को हमें चीन-स्पेन और चीन-यूरोप रिश्तों की प्रगति में आड़े नहीं आने देना चाहिए.’ पिछले दो साल में यह सांचेज की तीसरी यात्रा है.

आग में घी डाल रहे ट्रंप
ट्रंप ने जनवरी में सत्ता संभालने के बाद से चीनी सामान पर टैरिफ पांच बार बढ़ाया है. शुरुआती दो बार 10-10 परसेंट की बढ़ोतरी के बाद चीन ने संयमित जवाब दिया था. लेकिन पिछले हफ्ते ट्रंप ने 34 परसेंट अतिरिक्त टैरिफ और अपनी तथाकथित ‘लिबरेशन डे’ पॉलिसी के तहत अन्य देशों पर भी टैक्स लगाया. जवाब में चीन ने भी अमेरिकी सामान पर 34 परसेंट टैरिफ लगा दिया. इसके बाद ट्रंप ने 50 परसेंट टैरिफ लगा दिया और फिर 125 परसेंट टैरिफ बढ़ाकर कुल दर 145 परसेंट तक पहुंचा दिया. वाइट हाउस के लेटेस्ट मेमो में यह साफ बताया गया है.

अमेरिका से क्या खरीदता है चीन
2023 में अमेरिका का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात बाजार चीन था. इसमें तिलहन, अनाज, तेल और गैस जैसे उत्पाद शामिल थे, लेकिन इस टैरिफ से अमेरिकी किसानों को भी भारी नुकसान हो सकता है. 2022 में 9 लाख से ज्यादा अमेरिकी लोगों की नौकरियों को चीन ने सपोर्ट किया था. लेकिन टैरिफ की लड़ाई इन नौकरियों पर खतरा पैदा कर रही है. जिनपिंग का यूरोप को साथ लाने का बयान ट्रेड वार में नया मोड़ ला सकता है. अगर यूरोप ने उनकी बात मानी तो इससे अमेरिका पर दबाव बढ़ सकता है.


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