अगर रूसी रक्षा मंत्रालय प्रशासन है, तो जनरल स्टाफ रणनीति और युद्ध योजना का केंद्र. इसे रूसी सेना का ब्रेन सेंटर कहा जाता है.
नई दिल्ली : रूस को दुनियाभर में अपनी कुशल और विशाल सना के लिए जाना जाता है. रूस को सैन्य महाशक्ति माना जाता है और इसकी वजह केवल हथियारों का विशाल भंडार या न्यूक्लियर क्षमता ही नहीं है. रूस की असल ताकत उस मुश्किल लेकिन बेहद अनुशासित कमांड-स्ट्रक्चर में है, जिसे अक्सर रूसी वॉर मशीन कहा जाता है. रूसी आर्मी की यह संरचना राजनीतिक नेतृत्व, सैन्य प्रशासन, रणनीतिक दिमाग और फील्ड फोर्से – इन चार शाखाओं के बीच नियंत्रित समन्वय पर आधारित है.
चलिए आज आपको बताते हैं कि दुनिया की सबसे विशाल सेनाओं में से एक रूस की आर्मी काम कैसे करती है. इतनी बड़ी सेना को नियंत्रित रखने के लिए क्या किया जाता है और इसमें पद कैसे दिए जाते हैं. हम सभी को पता है कि इसी सप्रीम पावर राष्ट्रपति के हाथों में ही होती है. यही वजह है कि रूसी राष्ट्रपति जब भी किसी सैन्य घोषणा के लिए आते हैं, तो फौजी कमांडो की तरह वर्दी में आते हैं. रूसी सेना का स्ट्रक्चर कुछ इस तरह देख सकते हैं.
सेना का सुप्रीम कमांडर कौन?
रूस में सेना का अंतिम और सर्वोच्च नियंत्रण राष्ट्रपति के हाथ में होता है. रूसी संविधान उन्हें सशस्त्र बलों का सुप्रीम कमांडर इन चीफ घोषित करता है. राष्ट्रपति ही तय कर सकते हैं कि युद्ध शुरू करना या रोकना है. सामरिक सैन्य नीति, परमाणु हथियारों का उपयोग और उच्चतम स्तर की सैन्य नियुक्तियां भी वही करता है. राष्ट्रपति की भूमिका सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं है बल्कि रूस में राजनीतिक अधिकार और सैन्य अधिकार दोनों केंद्रीकृत हैं. इसलिए सैन्य फैसलों का अंतिम ऑर्डर राष्ट्रपति का होता है.
क्रेमलिन और सुरक्षा परिषद
राष्ट्रपति के रणनीतिक निर्णयों को लागू करने की प्रक्रिया क्रेमलिन में मौजूद सिक्योरिटी काउंसिल के साथ चलती है. यह परिषद राष्ट्रीय सुरक्षा, युद्ध नीति, रक्षा उन्नयन और खुफिया तालमेल पर सलाह देती है. आदेश की चेन कुछ इस तरह से होती है – पहले राष्ट्रपति के बाद सुरक्षा परिषद और फिर ये कमांड रक्षा मंत्री या जनरल स्टाफ के पास जाती है. यह परिषद रूस की सैन्य सुरक्षा नीति का राजनीतिक केंद्र कहा जा सकता है.
रूस का रक्षा मंत्रालय सेना की पूरी प्रशासनिक मशीनरी चलाता है. बजट और संसाधनों का नियंत्रण, हथियारों और उपकरणों की खरीद, प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक्स, सैन्य प्रशासन और संगठनिक ढांचा और डिफेंस इंडस्ट्री के साथ तालमेल बिठाकर चलता है. रक्षा मंत्री, राष्ट्रपति के निर्देशों पर काम करते हैं और वे राजनीतिक- प्रशासनिक पुल का काम करते हैं.
रूसी वॉर मशीन का ब्रेन सेंटर – जनरल स्टाफ
अगर रूसी रक्षा मंत्रालय प्रशासन है, तो जनरल स्टाफ रणनीति और युद्ध योजना का केंद्र. इसे रूसी सेना का ब्रेन सेंटर कहा जाता है. इसकी भूमिका युद्ध रणनीति बनाना, तैनाती का निर्णय, सैन्य अभियानों का संचालन, दुश्मन की रणनीतिक गतिविधियों का विश्लेषण और जमीन, हवा, समुद्र, साइबर, अंतरिक्ष से युद्ध की प्लानिंग होती है. जनरल स्टाफ रूस की उस क्षमता का मूल है, जो उसे अचानक बड़े पैमाने पर और तेजी से ऑपरेशन लॉन्च करने में सक्षम बनाता है.
चीफ ऑफ द जनरल स्टाफ – शीर्ष सैन्य अधिकारी
रूस के सक्रिय सैन्य ढांचे में सब से वरिष्ठ और शक्तिशाली यूनिफॉर्म वाले अधिकारी होते हैं – चीफ ऑफ द जनरल स्टाफ. ये रक्षा मंत्री को रिपोर्ट करते हैं और इनकी ताकत इतनी होती है कि सीधे राष्ट्रपति को सलाह दे सकते हैं. ये सभी सैन्य ऑपरेशन्स के नियंत्रक होते हैं और उनकी नियुक्ति भी राष्ट्रपति करते हैं. जनरल स्टाफ और रक्षा मंत्रालय मिलकर काम करते हैं, लेकिन युद्ध की रणनीति बनाने की ताकत चीफ ऑफ द जनरल स्टाफ के पास ही होती है.
रूसी सेना की चार बड़ी ताकतें हैं. रूस की सशस्त्र सेनाएं चार प्रमुख आर्म्ड ब्रांच में बांटी गई हैं –
ग्राउंड फोर्स – इसमें टैंक, बख्तरबंद वाहन, आर्टिलरी, मिसाइल ब्रिगेड, मोटराइज्ड इन्फैंट्री जैसे हथियार होते हैं.
एयर एंड स्पेस फोर्सेज – फाइटर जेट, बमवर्षक, मिसाइल-डिफेंस, उपग्रह नियंत्रण, स्पेस सिस्टम शामिल होते हैं.
नेवी – सरफेस वॉरशिप, पनडुब्बियां, बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां (SSBN), मरीन इन्फैंट्री शामिल हैं.
स्ट्रैटेजिक मिसाइल फोर्सेज – रूस की न्यूक्लियर वार मशीन ICBM, मोबाइल न्यूक्लियर लांचर, साइलो-बेस्ड मिसाइलें शामिल हैं.
इन सभी के अपने कमांडर इन चीफ होते हैं, जो जनरल स्टाफ और रक्षा मंत्रालय दोनों को रिपोर्ट करते हैं. इसके अलावा रूसी वॉरफेयर की रीढ़ होती हैं विशेष और खुफिया एजेंसियां. रूस की खुफिया व्यवस्था भी कई स्तर हैं. इन्हें इस तरह देख सकते हैं-
GRU मिलिट्री इंटेलिजेंस – पारंपरिक रूप से रक्षा मंत्रालय और जनरल स्टाफ को रिपोर्ट करता है.
सैन्य खुफिया – FSB (घरेलू सुरक्षा) और SVR (विदेशी सुरक्षा)
स्पेशल ऑपरेशन
साइबर ऑपरेशन
स्पेशल फोर्स स्पेट्सनाज
कैसी होती है रूसी आर्मी की कमांड चेन?
रूस में कोई भी सैन्य आदेश अलग-अलग स्तर से होकर जाता है. इसे हम इस तरह से देख सकते हैं –
राष्ट्रपति- रक्षा मंत्री / सुरक्षा परिषद – जनरल स्टाफ – शाखा कमांडर – ऑपरेशन कमांडर – बटालियन / कंपनी / प्लाटून
इस सिस्टम में राष्ट्रपति का नियंत्रण शीर्ष पर और फील्ड कमांड का नियंत्रण सबसे नीचे होता है. रूस में सैन्य संरचना संस्थागत होने के बावजूद, राष्ट्रपति का व्यक्तिगत प्रभाव बहुत मायने रखता है. उनके भरोसेमंद जनरल, सुरक्षा अधिकारी और मंत्री सैन्य मामलों पर उनकी पकड़ को और मजबूत करते हैं. रूस की सेना को उनके हथियारों की वजह से किलिंग मशीन या वॉर मशीन कहा जाता है वरना इसमें सेंट्रलाइज्ड पावर सिस्टम है. उनकी रणनीतिक और खुफिया क्षमता मिलकर रूसी आर्मी को दुनिया में सबसे संगठित और भयावह बनाती है.