लखनऊ : इंडिया गठबंधन की बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद विपक्षी दलों के बीच खींचतान तेज हो गई है. इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश में भी दिख रहा है, जहां गठबंधन के दो प्रमुख साथी कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (एसपी) अब एक-दूसरे से दूर होते नजर आ रहे हैं. दोनों दल पंचायत और विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव अलग-अलग लड़ने की तैयारी में हैं, जिससे उनके रिश्तों में तनाव और साफ झलक रहा है.
कांग्रेस और सपा में क्यों बढ़ रही दूरी
सूत्रों के अनुसार बिहार में मिली हार के बाद गठबंधन के भीतर रणनीति को लेकर मतभेद गहरे हुए हैं. कांग्रेस अब यूपी में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक जमीन मजबूत करना चाहती है. पार्टी संगठन को 403 विधानसभा क्षेत्रों में खड़ा करने पर फोकस कर रही है, इसलिए वह स्थानीय चुनाव में SP पर निर्भर नहीं रहना चाहती.
सूत्रों के अनुसार बिहार में मिली हार के बाद गठबंधन के भीतर रणनीति को लेकर मतभेद गहरे हुए हैं. कांग्रेस अब यूपी में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक जमीन मजबूत करना चाहती है. पार्टी संगठन को 403 विधानसभा क्षेत्रों में खड़ा करने पर फोकस कर रही है, इसलिए वह स्थानीय चुनाव में SP पर निर्भर नहीं रहना चाहती.
सपा की है यह मजबूरी
वहीं समाजवादी पार्टी अपनी एमएलसी संख्या बनाए रखने के लिए मजबूती से मैदान में उतरना चाहती है. सपा को डर है कि गठबंधन के नाम पर वह अपनी पारंपरिक मजबूत सीटों पर नुकसान न उठा ले.
गठबंधन पर क्या असर पड़ेगा?
हालांकि दोनों दल यह कह रहे हैं कि 2027 के विधानसभा चुनाव में उनका गठबंधन बरकरार रहेगा, लेकिन मौजूदा परिस्थितियां बताती हैं कि विश्वास का संकट बढ़ रहा है. बिहार की हार ने न सिर्फ राजनीतिक समीकरण बदले हैं, बल्कि आपसी रिश्तों में भी खटास ला दी है.
आगे क्या?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस और सपा यदि यूपी में तालमेल को बचाए रखना चाहते हैं, तो उन्हें बिहार की हार के बाद बने तनावपूर्ण माहौल को जल्द संभालना होगा, वरना 2027 की राह दोनों के लिए मुश्किल हो सकती है.




