कल्याण बनर्जी ने दिया अल्टीमेटम, 'अभिषेक या मुझे चुनो', आधी रात फोन कर केस से हटाया, डस्टबिन जैसा ट्रीट किया
कल्याण बनर्जी


कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के वरिष्ठ सांसद और कानूनी मामलों के जानकार कल्याण बनर्जी ने ऐसा बयान दिया है, जिसने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक, कल्याण बनर्जी ने साफ संकेत दिया है कि पार्टी को अब उनके और अभिषेक बनर्जी में से किसी एक को चुनना होगा।

मामला तब और गंभीर हो गया जब कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी से जुड़े एक महत्वपूर्ण कानूनी मामले से खुद को अलग कर लिया। हालांकि, बाद में उन्होंने इस फैसले के पीछे की वजह बताते हुए एक चौंकाने वाला खुलासा किया।

आधी रात का फोन कॉल बना विवाद की वजह
कल्याण बनर्जी के अनुसार, वह अभिषेक बनर्जी से जुड़े तलाशी और समन संबंधी एक अहम मामले की तैयारी में जुटे थे। उन्होंने अदालत में पेशी के लिए घंटों मेहनत की और केस की रणनीति तैयार की थी। लेकिन आधी रात को उन्हें एक फोन कॉल आया, जिसमें बताया गया कि उनकी जगह किसी दूसरे वकील को मामले की पैरवी की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

इस घटना से आहत कल्याण बनर्जी ने इसे अपने सम्मान पर चोट बताते हुए नाराज़गी जाहिर की।

"मुझे डस्टबिन की तरह इस्तेमाल मत कीजिए"
अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कल्याण बनर्जी ने कहा, "यह बेहद अपमानजनक है। अगर किसी और को केस लड़ाना था तो पहले बता देना चाहिए था। आधी रात को यह कहना कि अब मेरी जरूरत नहीं है, स्वीकार्य नहीं है। मुझे डस्टबिन की तरह ट्रीट मत कीजिए।"

उन्होंने कहा कि इस घटना से यह स्पष्ट हो गया कि उन पर कभी पूरा भरोसा नहीं किया गया।

अभिषेक बनर्जी पर लगाए गंभीर आरोप
कल्याण बनर्जी ने अपनी नाराज़गी का निशाना सीधे अभिषेक बनर्जी को बनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिषेक वरिष्ठ नेताओं का सम्मान नहीं करते और पार्टी के नेताओं के साथ कर्मचारियों जैसा व्यवहार करते हैं।

उन्होंने कहा, "वह बेहद अहंकारी हैं। 2022 से ही उन्होंने मुझ पर कभी भरोसा नहीं किया। उनके इसी अड़ियल रवैये का परिणाम है कि आज पार्टी को नुकसान उठाना पड़ रहा है।"

ममता बनर्जी के करीबी माने जाते हैं कल्याण
गौरतलब है कि कल्याण बनर्जी को लंबे समय से मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख Mamata Banerjee के भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता रहा है। पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद भी वह कई महत्वपूर्ण मामलों में पार्टी का कानूनी पक्ष अदालत में रखते रहे हैं। फर्जी हस्ताक्षर से जुड़े उस मामले में भी, जिसमें Abhishek Banerjee आरोपी हैं, कल्याण बनर्जी ही पार्टी की ओर से कानूनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

बढ़ सकती है टीएमसी की मुश्किल
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि कल्याण बनर्जी और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद और बढ़ते हैं, तो यह टीएमसी के लिए एक नई चुनौती बन सकता है। ऐसे समय में जब पार्टी पहले ही कई वरिष्ठ नेताओं की नाराज़गी का सामना कर रही है, कल्याण बनर्जी का खुला विरोध संगठन के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत माना जा रहा है।

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