अमेरिकी कंपनियों पर टैक्स तो व्यापार समझौता रद्द: ट्रंप ने ब्रिटेन-फ्रांस-भारत को दी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप


नई दिल्ली : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डिजिटल टैक्स को लेकर दुनिया के देशों को खुली धमकी दी है। सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ट्रंप ने कहा कि अगर कोई देश अमेरिकी टेक कंपनियों पर डिजिटल सर्विस टैक्स लगाता है तो उसके साथ व्यापार समझौतों का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। अमेरिका ऐसे देशों के निर्यात पर 100 फीसदी टैरिफ लगा देगा और जरूरत पड़ी तो व्यापार समझौते भी रद्द कर दिए जाएंगे। ब्रिटेन, फ्रांस और भारत पहले इस तरह के टैक्स की कोशिश कर चुके हैं।

ट्रंप की दो टूक: डिजिटल टैक्स लगाया तो 100% टैरिफ
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि अमेरिकी तकनीकी कंपनियों पर अगर कोई देश डिजिटल सर्विस टैक्स लगाने की कोशिश करता है तो उससे किया गया व्यापार समझौता रद्द कर दिया जाएगा। ऐसे देश को अमेरिका को होने वाले निर्यात पर 100 फीसदी टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है।

ट्रंप ने कहा, "अगर कोई देश डिजिटल टैक्स जैसा कदम उठाता है तो उसे 100 फीसदी टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। साथ ही जरूरत पड़ी तो उन देशों के साथ अमेरिका के व्यापार समझौतों को भी रद्द कर दिया जाएगा।" ट्रंप का मानना है कि अमेरिका के हितों के लिए किसी भी देश के खिलाफ कोई भी कदम उठाया जा सकता है।

क्या है डिजिटल सर्विस टैक्स, क्यों है अमेरिका को ऐतराज
डिजिटल सर्विस टैक्स उन कंपनियों पर लगाया जाता है जो ऑनलाइन विज्ञापन, डिजिटल बाजार और यूजर्स के डाटा का उपयोग करके पैसे कमाती हैं। यूरोपीय देशों का मानना है कि दिग्गज टेक कंपनियों को उन देशों में ही टैक्स चुकाना चाहिए, जहां से वे कमाई करती हैं।

अमेरिका इसका लगातार विरोध करता रहा है क्योंकि गूगल, मेटा, ऐपल, अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी अमेरिकी कंपनियों को इस तरह के बिजनेस से बंपर मुनाफा होता है। डिजिटल टैक्स लगने से ये सभी कंपनियां टैक्स के दायरे में जाएंगी।

ब्रिटेन-फ्रांस को दे चुके धमकी, भारत ने वापस लिया था प्रस्ताव
ब्रिटेन ने इस साल की शुरुआत में अमेरिकी टेक कंपनियों पर 2 फीसदी डिजिटल टैक्स लगाया था, जिसके बाद अमेरिका ने टैरिफ की चेतावनी दी थी। फ्रांस ने भी अमेरिकी कंपनियों पर डिजिटल टैक्स लगाने की बात कही थी, जिसके बाद ट्रंप ने फ्रांसीसी शराब पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दी थी।

भारत ने भी एक समय ग्लोबल टेक कंपनियों पर डिजिटल टैक्स का प्रस्ताव दिया था। इसके तहत अमेजन-फ्लिपकार्ट जैसे ई-कॉमर्स ऑपरेटरों पर 2 फीसदी और गूगल-फेसबुक जैसी कंपनियों पर 6 फीसदी टैक्स लगाने की बात थी। हालांकि बाद में भारत ने प्रस्ताव वापस ले लिया और OECD के टू-पिलर समाधान को अपनाने पर जोर दिया।


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