नई दिल्ली : नेपाल में फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप जैसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पर प्रतिबंध और भ्रष्टाचार को लेकर युवा ओली सरकार सड़क पर उतर आए हैं. सोशल मीडिया पर बैन लगाने से युवाओं के बीच भारी आक्रोश है. राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में हजारों की संख्या में सड़कों पर उतरे और जमकर प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन का नेतृत्व युवा कर रहे हैं इसलिए Gen-Z का आंदोलन कहा जा रहा है.
काठमांडू में हिंसक प्रदर्शन और युवाओं ने संसद भवन में घुसकर जमकर तोड़फोड़ औेर आगजनी की. पुलिस ने फिर आंसू गैस, पानी की बौछार और यहां तक की रबर बुलेट का इस्तेमाल किया. हालात पर काबू पाने के लिए नेपाल की सरकार ने काठमांडू, पोखरा समेत कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया और सड़कों पर सेना की तैनाती कर दी है.
इस प्रदर्शन के दौरान 20 लोगों की मौत हो गई है और 250 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. सोशल मीडिया बैन, भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के मुद्दों पर सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है. नेपाल में हालात सुबह से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं. शाम को भी जगह-जगह पर युवाओं का प्रदर्शन जारी है. इस बीच नेपाली कांग्रेस की पदाधिकारी बैठक के दौरान गृहमंत्री रमेश लेखक ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की है. इसे प्रदर्शनकारियों की बड़ी जीत मानी जा रही है.
क्यों बैन किया सरकार ने
नेपाल सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, ट्विटर समेत कई बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगाया. वजह ये बताई गई कि ये कंपनियां सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय में रजिस्टर नहीं हुई थीं. कई बार नोटिस देने और 7 दिन की डेडलाइन के बाद भी किसी ग्लोबल कंपनी ने आवेदन नहीं किया.




