लखनऊ कोर्ट परिसर के पास 200 से अधिक अवैध वकील चैंबरों पर चला नगर निगम का बुलडोजर
कार्रवाई को निष्पक्ष और बिना किसी बाधा के पूरा करने के लिए मौके पर भारी प्रशासनिक अमला और पुलिस बल मौजूद रहा।


लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा डिमोलिशन एक्शन देखने को मिला है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के सख्त रुख और दिए गए निर्देशों के अनुपालन में लखनऊ नगर निगम ने कोर्ट परिसर के आसपास की जमीनों पर बनी अवैध संरचनाओं को ध्वस्त करने का काम शुरू कर दिया है। 30 अगस्त को शुरू हुई इस बड़ी कार्रवाई के दौरान 200 से अधिक उन चैंबरों पर बुलडोजर चलाया गया, जिन्हें सरकारी भूमि, सार्वजनिक रास्तों और नालों पर अतिक्रमण करके बनाया गया था।

कार्रवाई को निष्पक्ष और बिना किसी बाधा के पूरा करने के लिए मौके पर भारी प्रशासनिक अमला और पुलिस बल मौजूद रहा। ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू करने से पहले एहतियात के तौर पर बिजली विभाग की टीमों ने संबंधित इलाकों की पावर सप्लाई पूरी तरह से काट दी, ताकि किसी भी हादसे से बचा जा सके।

नगर निगम प्रशासन के अनुसार, इन अवैध निर्माणों को चिन्हित करने के बाद संबंधित अधिवक्ताओं को पहले ही नोटिस जारी कर दिए गए थे। अतिक्रमण खुद हटाने और चैंबर खाली करने के लिए 29 अगस्त तक की अंतिम समय-सीमा तय की गई थी। मोहलत की अवधि समाप्त होते ही नगर निगम ने अपने पूर्व निर्धारित प्लान के तहत डिमोलिशन ड्राइव की शुरुआत कर दी।

सूत्रों के मुताबिक, इस कार्रवाई को रोकने के लिए वकीलों के एक समूह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख भी किया था और राहत की मांग की थी। हालांकि, शीर्ष अदालत से कोई फौरी राहत न मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन ने अभियान को तेजी से आगे बढ़ाया।

उल्लेखनीय है कि यह पहला मौका नहीं है जब लखनऊ में वकीलों के चैंबरों के खिलाफ ऐसा कड़ा कदम उठाया गया हो। इससे पहले मई के महीने में भी नगर निगम ने अतिक्रमण विरोधी अभियान के पहले चरण में कई अवैध ढांचों को गिराया था। वर्तमान में जारी यह बुलडोजर एक्शन उसी अभियान का दूसरा चरण माना जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक संपत्तियों और रास्तों को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराने तक यह अभियान जारी रहेगा।

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