लखनऊ : लखनऊ में आयोजित बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में पार्टी सुप्रीमो और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ तीखा रुख अपनाया। उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के अध्यक्षों, स्टेट और मंडल पदाधिकारियों की मौजूदगी में हुई इस बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति पर गहन मंथन हुआ।
मायावती ने सरकार की हालिया राहत घोषणाओं को 'ऊंट के मुंह में जीरा' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आते ही राजनीतिक दल महिलाओं और विभिन्न वर्गों को लुभावने वादे तथा 'रेवड़ियां' बांटकर ठगने का काम करते हैं, लेकिन सत्ता में आते ही वादों से मुकर जाते हैं।
युवाओं के मुद्दों पर बोलते हुए बसपा प्रमुख ने विशेष रूप से नई पीढ़ी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विरोधी दलों की गलत और जनविरोधी नीतियों के कारण आज की 'Gen-Z' और 'Gen-Alpha' पीढ़ी अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर आंदोलन करने को मजबूर है। युवाओं को सरकारी दमन और फर्जी मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है। मायावती ने दावा किया कि युवाओं की बेरोजगारी और गरीबी जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान केवल बसपा की पारदर्शी सरकार में ही संभव है।
बैठक में मायावती ने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे विरोधियों की 'साम, दाम, दंड, भेद' की राजनीति का मजबूती से मुकाबला करें और यूपी में 5वीं बार बसपा की सरकार बनाने के लक्ष्य में जुट जाएं। उन्होंने कहा कि राज्य में 'कानून द्वारा कानून का राज' और 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' की नीतियां लागू करना ही बसपा की प्राथमिकता है।
इसके अलावा, मायावती ने आगामी 9 अक्टूबर को बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस को लखनऊ स्थित स्मारक स्थल पर भव्य रूप से मनाने के निर्देश दिए। नोएडा केंद्र में मरम्मत कार्य चलने के कारण इस बार पूरे प्रदेश के कार्यकर्ता लखनऊ में ही एकत्रित होंगे। अंत में उन्होंने यूपी और नेपाल में आई भीषण बाढ़ पर चिंता जताते हुए प्रभावितों के लिए त्वरित राहत की मांग की।