नई दिल्ली : इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच भीषण जंग के बाद शुक्रवार दोपहर 4 बजे से सीजफायर लागू हो गया है। अमेरिका और कतर की मध्यस्थता और ईरान की रजामंदी से ये डील फाइनल हुई। एक सीनियर अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायली PM नेतन्याहू पर शांति के लिए भारी दबाव बनाया था। रातभर की लड़ाई में लेबनान में 18 लोगों की मौत और 4 इजरायली सैनिक मारे जाने के बाद दोनों पक्ष राजी हुए।
कैसे हुआ समझौता: ईरान ने दी हरी झंडी, ट्रंप ने नेतन्याहू को फटकारा
एक सीनियर अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, अमेरिका और कतर के बातचीत करने वालों ने ईरान की मदद से ये डील तैयार की। हिज्बुल्लाह के सांसद ने बताया कि ईरान ने साफ किया था कि पूरे सीजफायर के बिना वाशिंगटन से बात नहीं होगी। उधर ट्रंप ने नेतन्याहू को फोन पर फटकार लगाई। ट्रंप ने इजरायली हमलों को 'खतरनाक' और 'बहुत ज्यादा' बताया। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ने कहा, "अगर मैं नहीं होता तो इजरायल का वजूद नहीं होता... तुम जेल में होते।" एक्सियोस को अधिकारी ने बताया कि 'नेतन्याहू लेबनान में सीजफायर को रिन्यू करने के लिए 100% सहमत हैं।'
रातभर चली जंग: लेबनान में 18 मौतें, 4 इजरायली सैनिक मारे गए
सीजफायर से पहले लेबनान में हिंसा चरम पर थी। इजरायल की एयरस्ट्राइक में कम से कम 18 लेबनानी नागरिक मारे गए। वहीं दक्षिण लेबनान में हिज्बुल्लाह के हमले में 4 इजरायली सैनिकों की मौत हुई। अधिकारियों ने इसे जंग के दौरान हिज्बुल्लाह का सबसे खतरनाक हमला बताया। लगातार बढ़ रही हिंसा से अमेरिका-ईरान के बुधवार को हुए अंतरिम समझौते पर दबाव बन गया था।
डील की शर्त: हर मोर्चे पर मिलिट्री ऑपरेशन हमेशा के लिए बंद
ईरान के साथ हुई डील के तहत अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगियों को ऐलान करना है कि लेबनान समेत हर मोर्चे पर मिलिट्री ऑपरेशन तुरंत और हमेशा के लिए बंद किया जाए। इसका मकसद मिडिल ईस्ट में बड़ी जंग को खत्म करना है। इस हफ्ते की शुरुआत में हिंसा कम हुई थी, पर फिर भड़क गई। अब सीजफायर के बाद शांति की उम्मीद है। हालांकि नेतन्याहू के ऑफिस ने अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
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