टमाटर की खेती से भी किसानों को मिल सकता है अच्छा फायदा
टमाटर की पौध जनवरी-फरवरी में लगाई जाती है जो अप्रैल-मई में पककर तैयार होती है।


लखनऊ : टमाटर की खेती में मानसून का बहुत रोल होता है। खाकसर इस फसल के लिए गर्म और नर्म मौसम की जरूरत है। टमाटर का पौधा ज्यादा ठंड और उच्च नमी को बर्दाश्त नहीं कर पाता है। ज्यादा रोशनी से इसकी रंजकता, रंग और उत्पादकता प्रभावित होता है।
टमाटर के पौधे का विकास 10 से 30 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच होता है लेकिन सबसे अच्छी वृद्धि 21 से 24 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान में होता है। 16 डिग्री से नीचे और 27 डिग्री से ऊपर का तापमान को उपयुक्त नहीं माना जाता है।

टमाटर की पौध जनवरी-फरवरी में लगाई जाती है जो अप्रैल-मई में पककर तैयार होती है। पिछले दिनों टमाटर का भाव 100 रुपए प्रति किलो से अधिक हो गया था, जोकि अब घटकर 30 से 40 रुपए प्रति किलो तक गया है।

कृषि उपनिदेशक एसके सिंह की माने तो टमाटर की खेती भी एक बेहतर विकल्प है क्योंकि टमाटर अब न सिर्फ लोकप्रिय डिश बन चुका है बल्कि इसकी उपयोगिता चटनी, जूस, आचार, सॉस, केचअप, प्यूरी के तौर पर अत्यधिक है। उनका कहना है कि टमाटर में कार्बोहाइड्रेट, विटामीन, कैल्सियम, लौह तथा अन्य खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। टमाटर में लाल रंग लाइकोपीन नामक पदार्थ से होता है जिसे दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण एंटी आक्सीडेंट बताया गया है। 

शरद कालीन फसल के लिए जुलाई से सितंबर, बसंत-ग्रीष्म ऋतु के लिए नवंबर से दिसंबर तथ पहाड़ी क्षेत्र में इसकी बीज की बुआई मार्च-अप्रैल में की जानी चाहिए। रोपाई का सही समय शरद ऋतु में अगस्त से अक्टूबर तक, बसंत व ग्रीष्म में दिसंबर से जनवरी तथा पहाड़ी क्षेत्र के लिए अप्रैल से मई के बीच है।

बीज उत्पादन के बाद खराब और टूटे बीज को छांट लिया जाता है। बुआई वाली बीज हर तरह से उत्तम किस्म की होनी चाहिए। आकार में एक समान, मजबूत और जल्द अंकुरन वाली बीज को बुआई के लिए चुना जाता है। विपरीत मौसम को भी सहनेवाली एफ 1 जेनरेशन वाली हाईब्रीड बीज जल्दी और अच्छी फसल देती है।

टमाटर की यह हैं उन्नत किस्में
अरका सौरभ, अरका विकास, अरका आहूति, अरका आशीष, अरका आभा, अरका आलोक, एच एस 101, एच एस 102, एच एस 110, हिसार अरुण, हिसार लालिमा, हिसार ललित, हिसार अनमोल, के एस. 2, नरेन्द्र टोमैटो 1, नरेन्द्र टोमैटो 2, पुसा रेड प्लम, पुसा अर्ली ड्वार्फ, पुसा रुबी, को-1, को 2, को 3, एस- 12, पंजाब छुहारा, पी के एम 1, पुसा रुबी, पैयूर-1, शक्ति, एस एल 120, पुसा गौरव, एस 12, पंत बहार, पंत टी 3, सोलन गोला और अरका मेघाली।

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