10 रुपए की डाक टिकट बना सकती है आपको करोड़पति
आजादी के बाद भारत सरकार ने अपना डाक टिकट जारी किया.


नई दिल्ली : क्या कोई डाक टिकट आपको करोड़पति बना सकती है? सोच में पड़ गए, जी हां यह संभव है. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 10 रुपए की एक डाक टिकट आपको करोड़पति बना सकती है. लेकिन, इसके लिए एक शर्त है. महात्मा गांधी की यह डाक टिकट वर्ष 1948 में जारी हुई हो. यही नहीं इस पर 'सर्विस' प्रिंट भी होना चाहिए. अक्सर लोगों को इस तरह के डाक टिकट इकट्ठा करते देखा गया है. हालांकि, इस डाक टिकट को कम ही छापा गया था. इसलिए इस दुलर्भ डाक टिकट के पीछे की कहानी बड़ी दिलचस्प है.

सबसे कम छपी है ये डाक टिकट
आजादी के बाद भारत के गवर्नर जनरल ने इस डाक टिकट को ओवरप्रिंट कराया था, हालांकि, यह दुनिया में सबसे कम छपी है. एक अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, अंतिम बार जिनेवा में हुई नीलामी में इस डाक टिकट को दो लाख डॉलर (करीब एक करोड़ 30 लाख रुपए) में बेचा गया था. अगर किसी के पास गवर्नर जनरल की ‘कैंसिल’ की गई वास्तविक डाक टिकट हो तो उसकी कीमत करोड़ों रुपए में है. 

सिर्फ 200 टिकट छापी गई
आजादी से पहले भारत में ब्रिटिश सरकार का डाक टिकट चलता था. आजादी के बाद भारत सरकार ने अपना डाक टिकट जारी किया. इस दौरान ब्रिटिश सरकार को अपने दफ्तर बंद करते समय डाक टिकटों की आवश्यकता पड़ी. तब भारत सरकार ने 1948 में गांधी की तस्वीर वाली 10 रुपए के यह ‘सर्विस’ टिकट सिर्फ 200 जारी किए थे. इनमें से 100 डाक टिकट उस वक्त के गवर्नर जनरल ऑफ इंडिया को इस्तेमाल के लिए दी गई. बाकी 100 डाक टिकट में से कुछ अधिकारियों को दी गई और कुछ आज भी डाक संग्रहालय में उपलब्ध है. केवल 10 टिकट ऐसी थी जो बाहर बाजार में आई. यही कारण है कि यह टिकट बेशकीमती बन गई है.

5 लाख पाउंड में बिका था डाक टिकट
कुछ समय पहले 1948 में छपी महात्मा गांधी की यह डाक टिकट का एक सेट 5 लाख पाउंड (करीब 4.14 करोड़ रुपए) में बेचा गया था. इसे ऑस्ट्रेलिया के एक निवेशक ने किश्तों पर खरीदा था. इसके अलावा, उरुग्वे के स्टैनली गिब्सन ने कुछ समय पहले इसी दुर्लभ डाक टिकट की एक स्टैंप बेची थी, जिसकी कीमत 160000 पाउंड (करीब 1.32 करोड़ रुपए) थी.

फर्जी टिकटों की भरमार
अगर आप इसे ऑनलाइन खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं तो सावधान रहें. क्योंकि, इसकी कीमत जानने के बाद ऑनलाइन ऐसे फर्जी टिकटों की भरमार हो गई. ऑनलाइन इंक्वायरी डालने पर दर्जनों ऐसे फर्जी डाक टिकट सामने आते हैं, जिन पर ‘सर्विस’ अंकित होता है. लेकिन, यह वास्तविक टिकट नहीं है क्योंकि, यह तत्कालीन गवर्नर जनरल द्वारा ‘कैंसिल’ नहीं की गई है. दुर्लभ टिकट वही है जिसे जनरल ने कैंसिल किया था.

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