बचे माल पर नई कीमत नहीं छापी तो जेल की सजा खानी पड़ सकती है : रिपोर्ट
1 जुलाई से पूरे देश में लागू हुए वस्तु एवं सेवाकर यानी कि गुड्स एंड सर्विसेस एक्ट (जीएसटी) लागू हो गया है.


नई दिल्ली : 1 जुलाई से पूरे देश में लागू हुए वस्तु एवं सेवाकर यानी कि गुड्स एंड सर्विसेस एक्ट (जीएसटी) लागू हो गया है. अब सरकार ने कहा है कि जीएसटी लागू होने के बाद बचे हुए माल पर संशोधित कीमत न छापने पर विनिर्माताओं को जुर्माना/जेल की सजा हो सकती है. यानी, जुर्माना देना पड़ सकता है या फिर जेल की सजा भोगनी पड़ सकती है. पीटीआई न्यूज एजेंसी ने यह खबर दी है.

सरकार ने जीएसटी के क्रियान्वयन के बाद पहले के बचे हुए माल पर कीमत को लेकर भ्रम दूर करते हुए पिछले दिनों कहा था कि प्रकाशित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के साथ संशोधित कीमत को लेकर स्टिकर के उपयोग की अनुमति दी गयी है, यानी पुराने माल पर अब पहले के एमआरपी के साथ जीएसटी के बाद कीमत में हुए बदलाव की अलग से जानकारी देनी होगी. 

इसका मकसद बिक्री मूल्य में बदलाव को प्रतिबिंबित करना है. यह अनुमति तीन महीने के लिये दी गयी है. सरकार को यह जानकारी मिली थी कि कई कंपनियों के पास एक जुलाई से लागू जीएसटी से पहले के काफी माल बचे हुए हैं. पहले के सामान पर जीएसटी से पहले के सभी करों के साथ एमआरपी है लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के साथ कर घटने या बढ़ने के कारण कुछ वस्तुओं के खुदरा मूल्य में बदलाव आया है. उपभोक्ता मामलों के सचिव अविनाश श्रीवास्तव ने कहा कि पुराना एमआरपी को बचे हुए माल पर अनिवार्य रूप से दिखाना है और नई दर को स्टिकर के जरिये दिखाया जा सकता है.

हाल ही में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि जीएसटी 1 जुलाई से उम्मीद से ज्यादा आसानी से लागू हो गया, जबकि उन्हें इसमें अड़चन की संभावना दिखी थी. वहीं पिछले दिनों खबर आई थी कि देश में आधे से अधिक लोगों को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के बारे में जानकारी नहीं है. एक मोबाइल समाचार एप कंपनी के सर्वेक्षण में यह तथ्य सामने आया है. इस सर्वेक्षण में देश के 3.6 लाख लोगों की राय ली गई. इसमें यह तथ्य सामने आया कि तेलुगू भाषी दो राज्यों आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लोगों को जीएसटी के बारे में सबसे अधिक जानकारी है. इन राज्यों की 64 फीसदी आबादी को इस कर के बारे में पता है. वहीं आनलाइन के सर्वेक्षण के अनुसार जीएसटी के बारे में सबसे कम जानकारी तमिलनाडु के लोगों को है. यह सर्वेक्षण 26 से 30 जून के दौरान किया गया.  

अधिक बिज़नेस की खबरें