आनंद विषय मे नही बल्कि सत्संग में आना चाहिए : पूज्य प्रेम भूषण जी महाराज
Param pujya Prem Bhushan jee maharaj


लखनऊ, परमपूज्य प्रेम भूषण जी महाराज द्वारा राजधानी के बलरामपुर गार्डन में चल रही श्रीराम कथा के दूसरे दिन आज पूज्य महाराज जी ने राम जन्म की कथा का शानदार वर्णन अपने श्रीमुख से किया. 

पूज्य महाराज जी ने राम जन्म की कथा में कहा कि जब-जब धरती पर धरम की हानि होती है, पापाचार्य बढ़ता है तब-तब भगवान किसी न किसी रूप में इस धरती पर अवतरित होते है ऐसा ही एक रूप ईश्वर के अवतार में भगवान् श्रीराम का था.

पूज्य महाराज जी ने कहा कि  इस समय पुरुषोत्तम मास चल रहा है जो कि हर तीन साल पर एक बार आता हैं। उन्होंने कहा कि पुरषोतम मास में पूजा अर्चना का कई गुना लाभ होता है। 

अपनी कथा के सूक्त को बतलाते हुए पूज्य महाराज जी ने कहा कि सत्कर्मो को करते हुए प्रभु को अच्छा लगे वही हमें अच्छा लगना चाहिए। 

पूज्य महाराज जी ने कहा कि मानव जीवन मे जितना सत्कर्म हो जाये वही अपनी निजी संपत्ति है। उन्होंने कहा को अपने लिए नही बल्कि दूसरों के लिए व्यवहार करता है वही परमार्थी है। उन्होंने कहा कि आनंद विषय मे नही बल्कि सत्संग में आना चाहिए।          
बलरामपुर गार्डन में चल रही 9 दिवसीय श्रीराम कथा में आज भक्तों का जोश भी देखते ही बन रहा था. प्रभु श्रीराम की भक्ति रस में बह रहे पंडाल में उपस्थित भक्तों का जोश पूज्य महाराज जी के हर भजन के  साथ हिलोरे मार रहा था.  


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