रमजानुल मुबारक कुरान करीम का महीना है: मौलाना खालिद रशीद
रमजानुल मुबारक कुरान करीम का महीना है: मौलाना खालिद रशीद


लखनऊ: रमजानुल मुबारक वह मुकद्दस महीना है जिस में खुदा पाक ने तमाम इंसानों की भलाई के लिए अपनी सबसे पवित्र किताब कुरान मजीद नाजिल फरमाया। इस लिए हर रोजे दार को चाहिए कि इस मुबारक महीने में कुरान मजीद की तिलावत का एहतिमाम करें। खुदा पाक के रसूल मुहम्मद साहब ने इरशाद फरमयाः कि तुम में सबसे अच्छा वह शख्स है जो कुरान शरीफ को सीखे और सिखाये।’’ इस लिए हम सब को यह कोशिश होनी चाहिए कि कुरान को सीखने और सिखाने की तरफ विशेष ध्यान दें। अैर तरावीह का बुनियादी मकसद भी यही है कि इस में कुरान पढ़ा जाए और तरावीह की बीस रकातें सहाबा और बुजुर्गो से साबित है और उनका आज तक बीस रकआत तरावीह पढ़ने का मामूल रहा है। जुमे के खुतबे में मौलाना ने कहा कि रोजेदारों को इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि तरावीह की दो सुन्नतें हैं। एक तो यह कि तरावीह में कम से कम एक कुरान सुना जाए और दूसरी यह कि पूरे रमजान तरावीह पढ़ी जाए।  इन ख्यालात का इज्हार मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली इमाम ईदगाह लखनऊ ने ऐतिहासिक मस्जिद दरगाह शाह मीना शाह मेें किया। उन्होंने इस बात पर भीे जोर दिया कि मुसलमानों को चाहिए कि अपने अच्चों को ज्यादा से ज्यादा से कुरान मजीद हिफ्ज करायें क्योंकि हाफिजे कुरान की बहुत ज्यादा फजीलत हैं जैसा की महम्मद साहब ने फरमायाः‘‘ कि कयामत के दिन हाफिजे कुरान से कहा जायेगा कि कुरान पढ़ता जा और जन्नत के दरजों पर चढ़त जा और ठहर ठहर कर पढ़ जैसा कि दुनिया में ठहर ठहर कर पढ़ता था। बस तेरा मुकाम वही है जहाँ आखिरी आयत पर पहंुचे।
मौलाना ने इस अवसर माता पिता का ध्यान इस ओर केन्द्रित कराया कि जो माता पिता अपने बच्चों को कुरान की शिक्षा के तरफ विशेष ध्यान देते हैं। उनको अल्लाह के दरबार में बहुत इंआम व इकराम से नवाजा जाएगा। जैसा कि मुहम्मद साहब ने फरमाया: जो शख्स कुरान पढ़े और उस पर अमल करे उसके माता पिता को कयामत के दिन एक ताज पहनाया जायेगा जिस की रौशनी सूरज की रौशनी से ज्यादा होगी। अगर वह सूरज तुम्हारे घरों में हो। 
नमाज के बाद बैतुल मुकद्दस, बाबरी मस्जिद, शाम, सीरिया, फिलिस्तीन के लिए विशेष दुआयें की गयीं।

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