गर्भावास्था में महिलाएं स्वास्थ्य के प्रति बरते सजगता
कुछ महिलाएं बिना जटिलताओं के गर्भावस्था के सभी चरण पार कर लेती हैं लेकिन दुर्भाग्यवश कुछ माताओं को संक्रमण से जूझना पड़ता है जो उनके साथ-साथ नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य को भी खतरे में डाल देता है।


नई दिल्ली,  (हि.स.)। कुछ महिलाएं बिना जटिलताओं के गर्भावस्था के सभी चरण पार कर लेती हैं लेकिन दुर्भाग्यवश कुछ माताओं को संक्रमण से जूझना पड़ता है जो उनके साथ-साथ नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य को भी खतरे में डाल देता है। विभिन्न जटिलताओं में पोलियो, सेरेब्रल पाल्सी, समय से पहले जन्म, प्रीक्लेम्पसिया, क्लबफुट और पेट दर्द आदि के नाम लिए जा सकते हैं।

दुनिया भर में आज " विश्व स्वास्थ्य दिवस " मनाया जा रहा है। इस बार विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने स्वास्थ्य दिवस की थीम 'सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल : हरेक के लिए, हर कहीं' खास तौर पर महिलाओं और लड़कियों के लिहाज से अधिक खास है। सतत विकास लक्ष्यों के लिए अधिक समावेशी प्रणालियों, नियमित सेवाओं और बुनियादी ढांचे को तैयार किया जाना इस थीम का लक्ष्य है।

एक विकासशील राष्ट्र के रूप में भारत लगभग हर उद्योग में विदेशी पूँजी निवेश में वृधि करते हुए तरक्की की ओर अग्रसर है। देश की आर्थिक स्थिति के बावजूद स्वास्थ्य का क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है। हालांकि, जन्मजात विकलांग्ता का खतरा बना हुआ है ।

सेम्पल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) इंगित करता है कि 2008 और 2015 के बीच देश में 1.13 करोड़ बच्चों की मृत्यु उनके पांचवें जन्मदिन से पहले हो गई थी। 55 प्रतिशत से अधिक शिशुओं का जीवन 28 दिन पूरे होने से पहले ही समाप्त हो गया।

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