महिलाओं में बढ़ रहा ओवेरियन कैंसर, समय पर कराएं ये जाँच
मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर हर्षवर्धन आत्रेय


राजधानी लखनऊ में आलमबाग स्थित अपोलो सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल में मशहूर मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर हर्षवर्धन आत्रेय ने एक कार्यक्रम का आयोजन किया था जिसमे उन्होंने महिलाओं में बढ़ रही ओवेरियन कैंसर के बारे में जानकारी दी. साथ ही उससे बचने के उपाय और समय समय पर होने वाली जांचो के बारे में भी बताया। 

उन्होंने बताया की ओवेरियन कैंसर भारतीय महिलाओं में होने वाला चौथा सबसे आम कैंसर है लेकिन इसके बारे में अक्सर लोगों को देर से पता चलता है. जानकारी देते हुए बताया कि ये कैंसर के सभी मामलो में 18वां सबसे आम कैंसर है. अब धीरे धीरे लोगो को इसके बारे में जागरूकता नहीं होने से इसके मामले बढ़ते जा रहे है. 

ग्लोबो कैन 2012 के अनुसार प्रति 100,000 में 4.9 मामले ओवेरियन कैंसर के हैं. 56 प्रतिशत मामलों में पहचान तीसरे या चौथे चरण में हो पाती है जिसकी वजह से इलाज हो पाना मुश्किल हो जाता है. डॉक्टर ने बताया की ये 40-50 साल की उम्र में ये बीमारी हो सकती है. ये जेनेटिक होता है.

डॉक्टर का कहना था की अक्सर ऐसा होता है लोग बीमारी का पता लगने के बाद कई तरह के इलाज ढूंढते हैं जैसे घरेलु या आयुर्वेदिक इत्यादि।  ऐसा न करें बल्कि सही समय पर चेक अप इलाज कराये जिससे भविष्य में इसका खतरा कम हो 

ओवेरियन कैंसर के लक्षण 

पैल्विस या कमर में दर्द
शरीर के निचले हिस्से में दर्द
पेट और पीठ में दर्द
अपच
कम खाकर ही पेट भरा होने की फीलिंग
बार-बार यूरिन आना।   
यौन क्रिया के दौरान दर्द
मल त्याग की आदतों में बदलाव।

क्या है ओवेरियन कैंसर

ओवेरियन यानी यूटेरस कैंसर में यूटेरस यानी अंडाशय कैंसर में ओवरी में छोटे-छोटे सिस्ट बन जाती हैं। यूटेरस कैंसर होने पर गर्भधारण में समस्या होने की आशंका बढ़ जाती है। वहीं ओवरियरन कैंसर में गर्भाशय और ट्यूब्स डैमेज होने लगती हैं। डिंबग्रंथि कैंसर से मतलब है कि अंडाशय में किसी भी तरह के कैंसर का विकास। डिंबग्रंथि का कैंसर अधिकांशत: अंडाशय की बाहरी परत से पैदा होता है। सबसे आम तरह के डिंबग्रंथि कैंसर को एपिथेलियल ओवेरियन कैंसर (ईओसी) कहा जाता है।



ओवेरियन कैंसर का इलाज

सर्जरी

आम तौर पर अंडाशय कैंसर से ग्रस्त मरीज़ों के लिए सर्जरी ही पहली उपचार पद्धति होती है। अगर सर्जरी के दौरान सिर्फ एक अंडाशय को हटाया गया है, तो अभी भी संभावना है कि महिला माँ बन सकती है। हालांकि अगर दोनों अंडाशय निकाल दिए गए हैं तो गर्भधारण नहीं किया जा सकता। 
 
कीमोथेरेपी 

कीमो में दवाओं का प्रयोग करके कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है। उपचार में करीब 3-6 कीमोथेरेपी सेशंस होते हैं जो 3-4 हफ़्तों के अंतराल में होते हैं ताकि मरीज़ को रिकवर करने का समय मिल सके।

(देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं)  

अधिक सेहत/एजुकेशन की खबरें