1947 में देश के विभाजन के बाद समय-समय पर भारत आए शरणार्थियों को 70 साल के नारकीय जीवन से मुक्ति मिलने जा रही तथा उनका निर्वासन नागरिकता में तब्दील हो सकेगा.

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